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दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच बढ़ता तनाव: क्या है मामला?

दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच हालिया टकराव ने एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा दिया है। फिलीपीन कोस्ट गार्ड के अनुसार, एक चीनी तटरक्षक पोत ने उनके सरकारी जहाज को टक्कर मारी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया। चीन ने इस घटना को अपने कानून प्रवर्तन अभियान का हिस्सा बताया है, जबकि फिलीपींस ने इसे एक आक्रामक कार्रवाई करार दिया है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
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चीन-फिलीपींस विवाद की नई परत


नई दिल्ली: दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच चल रहे क्षेत्रीय विवाद ने एक बार फिर गंभीर मोड़ ले लिया है। हाल ही में, फिलीपीन कोस्ट गार्ड ने बताया कि एक चीनी तटरक्षक पोत ने उनके सरकारी जहाज को जोरदार टक्कर मारी। यह घटना तब हुई जब 'ब्यूरो ऑफ फिशरीज एंड एक्वेटिक रिसोर्सेज' (BFAR) का जहाज 'BRP दातुमगत सलामत' पलावान प्रांत के तट से लगभग 54 नॉटिकल मील दूर मछुआरों की नौकाओं में ईंधन भरने के लिए तैनात था। चीन ने इस घटना को अपने कानून प्रवर्तन अभियान के तहत सही ठहराया है।


चीन का स्पष्टीकरण

चीन का पलटवार


चीनी तटरक्षक बल के प्रवक्ता ने कहा कि फिलीपीनी जहाज ने बार-बार दी गई चेतावनियों की अनदेखी की और जानबूझकर चीनी जहाज के सामने आने की कोशिश की। बीजिंग का दावा है कि उनके अधिकारियों ने पेशेवर तरीके से कार्रवाई की और टक्कर के लिए पूरी जिम्मेदारी फिलीपींस पर डाली है।


घटनास्थल की स्थिति

खतरनाक घेराबंदी


फिलीपीन अधिकारियों ने घटना का एक वीडियो जारी किया है जिसमें चीनी तटरक्षक बल की खतरनाक हरकतें दिखाई गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चीनी जहाज ने जानबूझकर उनके सरकारी जहाज को टक्कर मारी, जिससे जहाज की सुरक्षा रेलिंग और डेक को गंभीर नुकसान पहुँचा। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी भी कर्मचारी या मछुआरे को चोट नहीं आई। मनीला ने इसे मानवीय सहायता में लगे जहाजों पर चीनी बल का प्रत्यक्ष हमला बताया है।


क्षेत्रीय तनाव की बढ़ती लहर

दक्षिण चीन सागर में बढ़ता तनाव


दक्षिण चीन सागर में इस तरह की घटनाएं अब सामान्य होती जा रही हैं। जुलाई में भी स्कारबोरो शोल के पास चीनी जहाजों ने फिलीपींस की नावों पर वॉटर कैनन चलाने का आरोप लगाया गया था। चीन अपनी काल्पनिक 'नाइन-डैश लाइन' के आधार पर इस क्षेत्र पर अपना अधिकार जताता है, जबकि फिलीपींस संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) के तहत अपने 200 नॉटिकल मील के 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन' (EEZ) का दावा करता है, जिसे वह 'वेस्ट फिलीपींस सी' कहता है।