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नेपाल के पीएम बालेन शाह का भारत दौरा: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की तैयारी

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अगले महीने भारत की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं। यह उनकी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा होगी, जो चीन के बजाय भारत की ओर है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है। यात्रा के दौरान, बालेन शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ महत्वपूर्ण वार्ता करेंगे और कई परियोजनाओं पर चर्चा की जाएगी। इस यात्रा से नेपाल और भारत के बीच सहयोग को और बढ़ाने की उम्मीद है।
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नेपाल के प्रधानमंत्री का भारत दौरा


नई दिल्ली: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह अगले महीने भारत की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं। उनकी यात्रा नवंबर के तीसरे या चौथे सप्ताह में होने की संभावना है। यह यात्रा उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद की पहली आधिकारिक विदेश यात्रा होगी, जो चीन के बजाय भारत की ओर है, और इसे कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन

सूत्रों के अनुसार, बालेन शाह की यात्रा तीन दिनों की होगी, जिसका मुख्य उद्देश्य नेपाल और भारत के बीच संबंधों को और मजबूत करना है। हालांकि, एक उच्च-स्तरीय राजनयिक सूत्र ने बताया कि यात्रा की आधिकारिक तारीखों की पुष्टि अभी बाकी है।


इस यात्रा के दौरान, बालेन शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इसके अलावा, वह भारत के कई वरिष्ठ मंत्रियों से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों और MoU पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।


परियोजनाओं पर चर्चा

पीएम मोदी ने बालेन शाह को शपथ ग्रहण के तुरंत बाद भारत आने का निमंत्रण दिया था। इससे पहले, बालेन शाह ने सितंबर में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भाग लिया था, जहां उन्होंने नेपाल में आई बाढ़ के दौरान भारत की सहायता के लिए आभार व्यक्त किया था। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस प्रस्तावित दौरे को समय की दृष्टि से उचित बताया है।


इस दौरे के लिए दोनों देशों ने उन परियोजनाओं की सूची तैयार की है जिनका उद्घाटन इस यात्रा के दौरान किया जा सकता है। इनमें कावरेपलानचोक में नेपाल पुलिस अकादमी, दारचुला में एक पुल, भैरहवा में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और महाकाली नदी पर एक मोटरेबल पुल शामिल हैं।


महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा

इसके अलावा, दोनों प्रधानमंत्री कुछ नई परियोजनाओं की आधारशिला भी रख सकते हैं, जिनमें दोधारा चांदनी में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट, लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना और सिलीगुड़ी को झापा से जोड़ने वाली पेट्रोलियम पाइपलाइन शामिल हैं।


बातचीत के दौरान, 750 मेगावाट की वेस्ट सेती, 480 मेगावाट की फुकोट करनाली और 450 मेगावाट की सेती रिवर-6 जैसी बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं पर चर्चा होने की संभावना है, जिनमें भारत की एनएचपीसी कंपनी शामिल है। इसके अलावा, सीमा विवाद, हवाई मार्ग, व्यापार, कोसी परियोजना, अयोध्या-जनकपुर रेल लिंक और नेपाल में AI क्षेत्र में भारतीय सहयोग जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।