नेपाल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र राणा की गिरफ्तारी की अफवाहें: क्या है सच?
नई दिल्ली में चोलेंद्र राणा की स्थिति पर असमंजस
नई दिल्ली: नेपाल के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा के संबंध में रविवार को स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। सुबह-सुबह मीडिया में उनकी गिरफ्तारी की खबरें तेजी से फैल गईं, लेकिन बाद में नेपाल पुलिस ने इन दावों का खंडन किया। पुलिस ने बताया कि राणा को गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि सुरक्षा कारणों से उन्हें थाने लाया गया था।
पुलिस ने दी जानकारी
क्राइम इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर ने की पुष्टि
काठमांडू वैली क्राइम इन्वेस्टिगेशन ऑफिस ने यह पुष्टि की है कि राणा इस समय टेकू स्थित कार्यालय में हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष खड़का ने बताया कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि राणा पर जानलेवा हमला हो सकता है, इसलिए उन्हें एहतियात के तौर पर पुलिस सुरक्षा में लाया गया। हालांकि, पुलिस ने यह नहीं बताया कि यह धमकी किस ओर से आई थी।
इससे पहले, स्थानीय मीडिया ने बताया था कि एक विशेष जांच टीम ने उन्हें काठमांडू स्थित उनके निवास से हिरासत में लिया है। इस खबर ने नेपाल की न्यायपालिका और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।
चोलेंद्र शमशेर राणा का परिचय
कौन हैं चोलेंद्र शमशेर राणा?
चोलेंद्र शमशेर राणा नेपाल की न्यायपालिका के सबसे चर्चित और विवादास्पद व्यक्तियों में से एक रहे हैं। उन्होंने 2019 में नेपाल के मुख्य न्यायाधीश का पद ग्रहण किया। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली द्वारा संसद भंग करने के निर्णय को पलट दिया, जिससे नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा को प्रधानमंत्री बनने का अवसर मिला।
हालांकि, इसके बाद उनका विवाद अपने ही साथी जजों से शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट के 15 से अधिक जजों और वकीलों ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने देउबा सरकार में अपने करीबी को मंत्री बनवाने का प्रयास किया। इस पर वकीलों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया और उनके इस्तीफे की मांग की। राणा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप संसद में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया और उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया।
निलंबन के बाद उनकी पेंशन रोक दी गई थी, जिस पर लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उनकी पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े सभी लाभ जारी किए जाएं, क्योंकि उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी।
