नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का भारत दौरा: नई शुरुआत की उम्मीद
बालेंद्र शाह का प्रस्तावित दौरा
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह नवंबर के अंत में भारत की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, जो 22 नवंबर के आसपास हो सकती है। यह उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद पहला द्विपक्षीय विदेश दौरा होगा। इस दौरे की तैयारी के लिए भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी अगले सप्ताह काठमांडू का दौरा करेंगे।
भारत के प्रति बालेंद्र शाह का रुख
बालेंद्र शाह ने मार्च में प्रधानमंत्री पद संभाला था, लेकिन तब से उन्होंने विदेश यात्रा नहीं की है। सितंबर में, वह केवल संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने न्यूयॉर्क गए थे, जो उनका एकमात्र बहुपक्षीय दौरा था। उनके भारत के प्रति दृष्टिकोण अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन सुधार की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
भारत-नेपाल संबंधों की समीक्षा
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में भारत के राजदूत सुधाकर दलेला अगले सप्ताह काठमांडू पहुंचेंगे। इसके बाद, 4 नवंबर को विदेश सचिव विक्रम मिसरी नेपाल का दौरा करेंगे, जहां वे बालेंद्र शाह के दौरे का एजेंडा तय करेंगे और दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा करेंगे।
नई शुरुआत की दिशा में कदम
नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने भारत के साथ संबंधों में नई शुरुआत की बात की है। इसके तहत, व्यापार और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। हवाई, सड़क और डिजिटल संपर्क, सीमा सुरक्षा, रोजगार और शिक्षा के अवसरों पर चर्चा की जाएगी।
विकास परियोजनाओं में तेजी
सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान भारत की सहायता से चल रही कई विकास परियोजनाओं में तेजी आ सकती है। नेपाल की अर्थव्यवस्था और हाल की बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण के लिए नई सहायता की घोषणा भी संभव है।
भारत-नेपाल रिश्तों में बदलाव
विक्रम मिसरी का नेपाल दौरा पहले मई में निर्धारित था, लेकिन इसे टाल दिया गया था। कहा गया था कि बालेंद्र शाह विदेश सचिव से मिलने को तैयार नहीं थे। इसके बाद, RSP नेता रबि लामिछाने और विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत का दौरा किया।
सीमा विवाद पर संभावित चर्चा
शिशिर खनाल के दौरे से पहले लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्रों को लेकर विवाद उठ चुका है। नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है। हाल में शाह के बयानों से संकेत मिला था कि इस विवाद के समाधान में चीन और ब्रिटेन की भूमिका हो सकती है, जबकि भारत ने किसी तीसरे पक्ष की भूमिका से इनकार किया है।
