नेपाल के रौतहट में प्रदर्शन: पीएम बालेन शाह का पुतला जलाया गया
गुस्से में लोग: पीएम बालेन शाह का पुतला जलाया
नई दिल्ली: नेपाल के रौतहट जिले में, जो भारत की सीमा से सटा हुआ है, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। बिहार के सीतामढ़ी से लगे मौलापुर नगरपालिका में, गुरुवार को नागरिकों ने सड़कों पर उतरकर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का पुतला जलाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि केंद्र सरकार की लापरवाही के कारण नगरपालिका का कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है।
नगरपालिका में प्रशासनिक संकट
प्रदर्शन का मुख्य कारण नगरपालिका में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति न होना है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, संघीय मामलों और सामान्य प्रशासन मंत्रालय ने सुरेश बाबू घिमिरे को मौलापुर नगरपालिका में नियुक्त किया था, लेकिन उन्होंने कभी भी अपना कार्यभार नहीं संभाला।
बाद में मंत्रालय ने उन्हें वापस बुला लिया, लेकिन उनकी जगह किसी अन्य अधिकारी को नहीं भेजा गया। इसके परिणामस्वरूप, नगरपालिका बिना किसी शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी के चल रही है, और यह स्थिति महीनों से बनी हुई है।
स्थानीय जीवन पर प्रभाव
मुख्य अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण स्थानीय कार्य प्रभावित हो गए हैं। निवासियों का कहना है कि विकास कार्य, बजट का उपयोग और कर्मचारियों की वेतन सभी रुके हुए हैं। नगरपालिका स्कूल के शिक्षकों को पिछले लगभग 6 महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उन्होंने 'पेन-डाउन' आंदोलन भी किया है।
मल्टी-सेक्टर न्यूट्रिशन प्रोग्राम के तहत गर्भवती महिलाओं और नई माताओं को मिलने वाला भुगतान भी रुका हुआ है। सफाई कर्मचारियों ने बकाया वेतन न मिलने के कारण काम बंद कर दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में कचरा जमा हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना अधिकारी के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ रही है और आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं पूरी तरह ठप हैं।
मेयर का केंद्र पर आरोप
मौलापुर की मेयर, रीना कुमारी साह ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बजट लागू करने के महत्वपूर्ण समय में जानबूझकर अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। मेयर ने कहा, "यह देरी प्रशासनिक संकट उत्पन्न करने और नगरपालिका के कार्यों में बाधा डालने के लिए की गई है। सरकार बजट को लागू नहीं होने देना चाहती।"
प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री बालेन शाह का पुतला जलाया और मांग की कि जल्द से जल्द मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति की जाए। उनका कहना है कि जब तक यह पद नहीं भरा जाएगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। सीमा से सटे इस क्षेत्र में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब यह देखना होगा कि काठमांडू सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है।
