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नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़: क्या है असली कारण?

नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भयंकर बाढ़ के कारणों की जांच जारी है। प्रारंभ में इसे हिमनदी झील के फटने से जोड़ा गया था, लेकिन अब वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बड़े भूस्खलन का परिणाम हो सकता है। इस आपदा में 5,000 से अधिक लोग लापता या मृत हैं, और संख्या बढ़ने की आशंका है। जानें इस घटना के पीछे की सच्चाई और वैज्ञानिकों की नई खोजों के बारे में।
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नई जानकारी सामने आई


नई दिल्ली: नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट आई भयंकर बाढ़ के बारे में नई जानकारी सामने आई है। प्रारंभ में यह अनुमान लगाया गया था कि यह बाढ़ हिमनदी झील के फटने के कारण हुई थी, जिसे GLOF कहा जाता है। लेकिन बाद में यह स्पष्ट हुआ कि जिस क्षेत्र में बाढ़ आई, वहां तिब्बत की ओर कोई हिमनदी झील नहीं टूटी थी। इस कारण इस सिद्धांत को खारिज कर दिया गया।


बाढ़ के कारणों पर चर्चा

नेपाल के आपदा प्रबंधन केंद्र के अध्यक्ष बिशाल नाथ उप्रेती ने बताया कि प्रारंभिक दिनों में बाढ़ के कारणों को लेकर कई अटकलें थीं। पहले यह भी कहा गया कि भूकंप के कारण बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टानें गिर गईं, जिससे बाढ़ आई।


भूकंप की तीव्रता में बदलाव

उप्रेती के अनुसार, भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 4.2 बताई गई थी, जिसे बाद में 5.2 कर दिया गया। लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के विश्लेषण से पता चला कि घटनाक्रम शायद इसके विपरीत था। यानी पहले बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा गिरा और उसके बाद भूकंप आया। इस प्रकार, भूकंप को बाढ़ का मुख्य कारण नहीं माना जा रहा है।


लापता और मृतकों की संख्या

आपदा की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 5,000 से अधिक लोग लापता या मृत बताए जा रहे हैं। उप्रेती ने आशंका जताई है कि यह संख्या आगे चलकर 7,000 या 10,000 तक भी पहुंच सकती है। उन्होंने बताया कि लगभग तीन घंटे बाद एक और भूस्खलन हुआ, जिससे एक प्राकृतिक बांध टूट गया और एक छोटी बाढ़ आई। हालांकि, पानी की गति कम थी, इसलिए इससे बड़ा नुकसान नहीं हुआ।


बाढ़ का असली कारण क्या है?

वैज्ञानिक अभी भी इस प्रश्न का उत्तर खोज रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचना कठिन होने के कारण वर्तमान में सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से जांच की जा रही है। एक नई संभावना यह है कि यह घटना हिमनदी झील के फटने के कारण नहीं, बल्कि बड़े भूस्खलन के कारण हुई हो सकती है। माना जा रहा है कि भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानें एक साथ खिसकीं, जिससे अचानक मलबे का तेज बहाव उत्पन्न हुआ। हालांकि, उप्रेती ने स्पष्ट किया है कि यह अभी केवल एक अनुमान है। वैज्ञानिकों को इस पर और गहराई से जांच करनी होगी, तभी आपदा के असली कारण की पुष्टि हो सकेगी।