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नेपाल में बाढ़ का कहर: 942 लोग अब भी लापता, राहत कार्य जारी

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के 11वें दिन राहत और बचाव कार्यों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। बचाव दल ने मलबे में फंसे दो व्यक्तियों को सुरक्षित निकाला है, लेकिन 942 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,344 हो गई है, जिसमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। भोटेकोशी नदी में आई प्रचंड बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई क्षेत्रों को तबाह कर दिया है। जानें इस आपदा की पूरी कहानी और राहत कार्यों की स्थिति।
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कुदरत का करिश्मा: बचाव कार्य में मिली सफलता


नई दिल्ली: नेपाल में आई भयंकर बाढ़ के 11वें दिन राहत और बचाव कार्यों में एक बार फिर से सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। शनिवार को, बचाव दल ने मलबे और सुरंग में फंसे दो व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने में सफलता प्राप्त की। नेपाल सेना, दक्षिण कोरिया के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम ने अत्यधिक जोखिम भरे हालात में यह रेस्क्यू ऑपरेशन किया। पहली सफलता त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में मिली, जहां एक चीनी नागरिक को ऑडिट-4 सुरंग से सुरक्षित निकाला गया। दूसरी सफलता नुवाकोट जिले के विदुर नगरपालिका में बेत्रावती में मिली, जहां एक चार मंजिला इमारत के मलबे में दबी 64 वर्षीय चंडिका श्रेष्ठ को सब-इंस्पेक्टर सुमन कुमार बीके के नेतृत्व में नौ सदस्यीय टीम ने कड़ी मेहनत के बाद बचाया।


लापता लोगों की संख्या में वृद्धि

अब भी 942 लोग लापता


बचाव दल विपरीत परिस्थितियों में लगातार खोजबीन कर रहे हैं, लेकिन आपदा की गंभीरता अभी भी बनी हुई है। बाढ़ से प्रभावित कुल 942 लोग अब भी लापता हैं। सुरक्षा बल अत्यंत दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रहे हैं ताकि मलबे में दबे अन्य लोगों तक पहुँच बनाई जा सके।


विदेशी नागरिकों की भी चिंता

589 विदेशी नागरिक भी लापता


प्रभावित क्षेत्रों से लगातार शवों की बरामदगी के साथ नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,344 तक पहुँच गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बरामद शवों में 758 वयस्क और 85 बच्चे शामिल हैं, जबकि 501 शव ऐसे हैं जिनके अंग क्षत-विक्षत हो चुके हैं। यह स्थिति पानी में लंबे समय तक डूबे रहने और भारी मलबे के दबाव के कारण हुई है। बचाव दल फिलहाल लगभग 5,000 लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं, जिनमें कम से कम 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। राहत टीमों ने अब तक 13,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है।


भोटेकोशी नदी में आई तबाही

भोटेकोशी नदी में आई तबाही


यह तबाही 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए भीषण हिमस्खलन के कारण शुरू हुई थी। इसके बाद हिमालयी क्षेत्र से बहने वाली भोटेकोशी नदी में आई प्रचंड बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गाँवों को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। उफनती नदी ने मकान, गाड़ियाँ, पुल और सड़कें बहा ले गईं। इस आपदा का असर चीन के सीमावर्ती इलाकों पर भी पड़ा है, जहां कम से कम 21 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और तिब्बत क्षेत्र में 500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में सबसे अधिक 360 शव अकेले चितवन जिले से बरामद हुए हैं, जबकि रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी के क्षेत्रों में भी भारी तबाही हुई है।