नेपाल में बाढ़ के बाद पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयास
नेपाल में बाढ़ का पर्यटन पर प्रभाव
काठमांडू, 7 सितंबर: नेपाल में हाल की विनाशकारी बाढ़ के चलते पर्यटन पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए सरकार ने विदेशी पर्यटकों को आश्वस्त करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि देश अब भी पर्यटकों के लिए खुला है और हिमालयी ट्रैकिंग मार्ग आगंतुकों का स्वागत करने के लिए तैयार हैं। नेपाल के पर्यटन मंत्री खड़ग राज पौडेल ने सोशल मीडिया पर 'नेपाल कॉलिंग' नामक एक अभियान शुरू किया है।
इस पहल के माध्यम से उन्होंने विदेशी पर्यटकों से नेपाल आने की अपील की है, यह बताते हुए कि प्राकृतिक आपदा के बावजूद देश के प्रमुख पर्यटन स्थल सामान्य स्थिति में हैं। पौडेल ने अपने वीडियो संदेश में कहा, 'नेपाल अब भी खुला है... हमारे हिमालयी ट्रैकिंग मार्ग आपका इंतजार कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि इस समय छुट्टियां बिताने के लिए नेपाल आने से देश की मदद होगी, जो बाढ़ से प्रभावित है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नेपाल के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पर्यटन क्षेत्र का योगदान लगभग 6.7 प्रतिशत है और यह 10 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है। पर्यटन क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी का असर होटल, ट्रैकिंग एजेंसियों, गाइड, पोर्टर, विमानन कंपनियों, रेस्तरां और परिवहन सेवाओं पर पड़ सकता है।
बाढ़ के कारण पर्यटन सीजन पर असर
समाचार पोर्टल के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ ने सितंबर से नवंबर के बीच शुरू होने वाले पर्यटन के व्यस्त सीजन पर असर डालने की आशंका जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में साल भर में आने वाले पर्यटकों में से लगभग 40 प्रतिशत सितंबर से नवंबर के बीच आते हैं। अगस्त में नेपाल में 85,444 विदेशी पर्यटक आए, जो पिछले साल की तुलना में 3.65 प्रतिशत कम थे।
बाढ़ के बाद अगस्त के अंतिम सप्ताह में पर्यटन व्यवसायियों ने बड़ी संख्या में बुकिंग रद्द होने की सूचना दी है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई इस बाढ़ ने उत्तर और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को प्रभावित किया। भोटेकोशी नदी में आए सैलाब ने घरों, वाहनों, सड़कों और पुलों को बहा दिया और जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया।
सरकार के प्रयास और भविष्य की योजनाएं
पर्यटन संकट को रोकने के लिए नेपाल सरकार ने अपने राजनयिक मिशनों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से यह संदेश फैलाने को कहा है कि आपदा केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित है और देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों तथा हवाई अड्डों पर स्थिति सामान्य है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पिछले सप्ताह काठमांडू में राजनयिक मिशनों और विकास साझेदारों के प्रतिनिधियों को बताया कि काठमांडू घाटी, पोखरा, चितवन, लुंबिनी, जनकपुर, अन्नपूर्णा, सगरमाथा और बर्दिया पर्यटकों के लिए खुले हैं।
नेपाल का पर्यटन उद्योग कोविड-19 महामारी के बाद पूरी तरह से उबर नहीं पाया है। इसके अलावा, राजनीतिक अस्थिरता और पश्चिम एशिया में संघर्ष से जुड़ी चिंताओं ने भी क्षेत्र को प्रभावित किया है। काठमांडू के थमेल पर्यटन क्षेत्र में डोम हिमालय होटल के प्रबंध निदेशक मंदीप गिरि ने कहा कि आपदा के एक सप्ताह के भीतर सितंबर-नवंबर पर्यटन सीजन के लिए लगभग 20 प्रतिशत बुकिंग रद्द हो चुकी हैं।
पर्यटन उद्योग को चिंता है कि बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें, जिनमें जलमग्न सड़कें, टूटे पुल और फंसे लोग दिखाई दे रहे हैं, संभावित पर्यटकों के बीच यह गलत धारणा बना सकती हैं कि पूरा नेपाल प्राकृतिक आपदा से प्रभावित है। नेपाल होटल संघ के अध्यक्ष विनायक शाह ने संसद की एक समिति की बैठक में कहा कि विदेशों में स्थित नेपाली दूतावासों के माध्यम से यह संदेश प्रभावी रूप से पहुंचाया जाना चाहिए कि नेपाल सुरक्षित है।
सरकार की नई रणनीतियाँ
संसद की अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं पर्यटन समिति ने सरकार से नेपाल के पर्यटन बाजार में विश्वास बहाल करने के लिए तत्काल रणनीति तैयार करने का आग्रह किया है। समिति की अध्यक्ष सुमनिमा उदास ने कहा कि आपदा के बाद पर्यटन क्षेत्र को लेकर 'सकारात्मक और विश्वसनीय' संदेश देना आवश्यक है। सरकार विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मुफ्त वीजा, होटल में छूट और यात्रा को आसान बनाने जैसे प्रोत्साहनों पर विचार कर रही है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के कार्यवाहक प्रमुख हिमकत सिंह ऐर ने कहा कि राहत पैकेज में जरूरत पड़ने पर हवाई किराये और होटल में छूट भी शामिल की जा सकती है। बोर्ड पर्यटन मंत्रालय के साथ मिलकर 'नेपाल कॉलिंग' अभियान को और मजबूत करने की योजना बना रहा है। पौडेल ने रसुवा क्षेत्र को 'जलवायु विरासत क्षेत्र' के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा है, ताकि इस आपदा को नेपाल के व्यापक जलवायु न्याय अभियान से जोड़ा जा सके।
