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नेपाल में बाढ़: जलवायु परिवर्तन के खिलाफ न्याय की मांग

नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई, जिसमें 1,300 से अधिक लोग मारे गए और हजारों लापता हैं। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को लेकर दुनिया से न्याय की मांग की है। नेपाल का कहना है कि उसने वैश्विक प्रदूषण में बहुत कम योगदान दिया है, फिर भी उसे सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र महासभा में उठाने की योजना है, जहां नेपाल क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर देगा।
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नेपाल में बाढ़ का कहर

26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा पर एक ग्लेशियर के टूटने से आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई। इस आपदा में नेपाल में 1,300 से अधिक लोगों की जान चली गई है, जबकि 5,000 से ज्यादा लोग लापता हैं। यह आंकड़े अभी भी बढ़ते जा रहे हैं। नेपाल ने पहले भी ग्लेशियर के टूटने या झील के फटने के कारण गंभीर नुकसान का सामना किया है। नेपाल का कहना है कि उसने वैश्विक प्रदूषण में बहुत कम योगदान दिया है, फिर भी उसे सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.


जलवायु परिवर्तन पर नेपाल का दृष्टिकोण

हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, और इसके पीछे बड़े औद्योगिक देशों का प्रदूषण है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने हाल ही में संसद में कहा कि जलवायु परिवर्तन की समस्या में पूरी दुनिया की भागीदारी है, इसलिए इसे सुधारने की जिम्मेदारी भी सभी देशों की है। उन्होंने यह भी कहा कि नेपाल को इस मुद्दे को मजबूती से उठाना चाहिए.


मुआवजे की मांग का खंडन

हाल ही में कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया कि नेपाल ने अमेरिका, चीन और भारत से जलवायु परिवर्तन के लिए मुआवजे की मांग की है। इस पर नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने स्पष्ट किया कि नेपाल की एकमात्र मांग यह है कि हालिया आपदा को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के रूप में देखा जाए और क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाया जाए.


क्लाइमेट जस्टिस की आवश्यकता

नेपाल का कहना है कि उसका वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में योगदान लगभग नगण्य है। जबकि चीन, अमेरिका और भारत जैसे देश सबसे अधिक ग्रीनहाउस गैसें उत्सर्जित करते हैं। प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बताया कि हिमालयी क्षेत्र का तापमान 1.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है, जो इस आपदा का एक प्रमुख कारण है.


जलवायु न्याय का अर्थ

जलवायु न्याय का तात्पर्य है कि जिन देशों ने लंबे समय तक अधिक प्रदूषण फैलाया है, उन्हें इसके परिणामों की भरपाई करनी चाहिए। खासकर उन देशों के लिए, जिन्होंने प्रदूषण कम किया है लेकिन प्राकृतिक आपदाओं का सबसे अधिक सामना कर रहे हैं. नेपाल का कहना है कि उसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि उसका योगदान बहुत कम है.


आर्थिक मुआवजे की मांग नहीं

हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि नेपाल ने अमेरिका, चीन और भारत से आर्थिक मुआवजे की मांग की है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि नेपाल की मांग आर्थिक नहीं है, बल्कि यह है कि इस आपदा को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के रूप में देखा जाए.


संयुक्त राष्ट्र महासभा में उठेगा मुद्दा

रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेन शाह संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस मुद्दे को उठाने की योजना बना रहे हैं, जो न्यूयॉर्क में 8 सितंबर से शुरू होगी। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक साझा वैश्विक समस्या है, जिसमें विकसित देशों को विकासशील देशों की मदद करनी चाहिए.