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नेपाल में बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ से तबाही, 80 से अधिक लोग बचाए गए

नेपाल के गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। अधिकारियों ने 80 से अधिक लोगों को बचाया, जिनमें नौ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ के कारण कई मकान, पुल और जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। राहत कार्य जारी है, लेकिन पांच लोग अब भी लापता हैं। जानें इस आपदा के पीछे के कारण और प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री का वितरण कैसे किया जा रहा है।
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नेपाल के गोरखा जिले में बाढ़ का कहर

(फोटो के साथ) काठमांडू, 11 अक्टूबर - नेपाल के गोरखा क्षेत्र में रविवार को बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आई, जिससे मकान और पुल बह गए और जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने 80 से अधिक लोगों को बचाया, जिनमें नौ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जबकि पांच लोग अब भी लापता हैं। यह घटना 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ के लगभग डेढ़ महीने बाद हुई है।


बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य

नेपाल अभी भी नेपाल-चीन की पहाड़ी सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ से उबर रहा है, जिसमें 1,400 से अधिक लोगों की जान गई थी। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, गोरखा जिले में चार हेलीकॉप्टरों की मदद से 82 लोगों को बचाया गया है। लापता पांच लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं।


बाढ़ के कारण हुए नुकसान का आकलन

प्राधिकरण ने बताया कि बाढ़ और भूस्खलन के कारण दो झूला पुल, दो मोटर योग्य पुल, तीन जलविद्युत परियोजनाएं और 34 मवेशियों के बाड़े क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, 45 मकान पूरी तरह और 27 मकान आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। तीन वाहन भी बाढ़ में बह गए।


सुरक्षा बलों की तैनाती और राहत सामग्री का वितरण

अधिकारियों ने राहत और बचाव कार्यों में नेपाली सेना के 171 जवानों सहित 700 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। प्रभावित क्षेत्रों में तंबू, कंबल, गद्दे, स्लीपिंग बैग और रसोई का सामान भेजा गया है। चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बाढ़ ने सल्लेरी, पैयुका और जगत के नदी किनारे के इलाकों में मकान बहा दिए।


बाढ़ का कारण और स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) ने बताया कि गोरखा जिले के चुमचेत के पास भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह अस्थायी रूप से बाधित हो गया था, जिससे बाढ़ आई। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाढ़ सुबह करीब चार बजे आई, जिसके बाद वे सुरक्षित स्थानों की ओर भागे।


पर्यटकों की स्थिति

मनास्लु की यात्रा पर जा रहे पर्यटक भी बाढ़ के कारण फंस गए हैं। मनास्लु संरक्षण क्षेत्र परियोजना (एमसीएपी) ने बताया कि बाढ़ में पैदल रास्ता और पुल बह जाने के कारण पर्यटक अपने ठहरने के स्थान पर फंसे हुए हैं।