नेपाल में भूस्खलन से बढ़ा बाढ़ का खतरा: भारत-नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट
प्राकृतिक आपदा का नया संकट
नई दिल्ली: नेपाल के दार्चुला जिले में हाल ही में आए भूस्खलन ने एक नई प्राकृतिक आपदा का खतरा उत्पन्न कर दिया है। अपी हिमाल ग्रामीण नगरपालिका के भट्टार क्षेत्र में एक विशाल पहाड़ी का हिस्सा अचानक गिरकर चौलानी (चमेलिया) नदी में समा गया, जिससे नदी का प्रवाह आंशिक रूप से बाधित हो गया है। मलबे और चट्टानों के कारण पानी का दबाव बढ़ता जा रहा है, जिससे कृत्रिम झील बनने और उसके टूटने पर भयंकर बाढ़ आने की आशंका बढ़ गई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए दार्चुला जिला प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों और महाकाली नदी के निचले हिस्से में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सख्त सलाह दी है।
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई
चौलानी नदी, जो अपी हिमाल से निकलती है, महाकाली नदी में मिलती है, जो भारत-नेपाल सीमा का निर्धारण करती है। ऐसे में, इस आपदा का प्रभाव भारतीय गांवों पर भी पड़ सकता है। ऊपरी ढलानों से मलबा गिरने के कारण नदी का मार्ग अवरुद्ध होने और अचानक जलप्रलय का खतरा उत्पन्न हो गया है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, भारत और नेपाल के सीमा सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड में रखा गया है।
सुरक्षा बलों की तैनाती
आपदा के बढ़ते खतरे को देखते हुए, सुदूरपश्चिम प्रांत के मुख्यमंत्री खगराज भट्टा ने सभी सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है। बांलच स्थित 'नेपाल चमेलिया जलविद्युत सुरक्षा बेस' से सशस्त्र प्रहरी बल (APF) की विशेष टीमों को तैनात किया गया है, जो चौलानी नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी कर रही हैं। निचले इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए लाउडस्पीकर और माइक के माध्यम से चेतावनियाँ दी जा रही हैं। इसके साथ ही, जिला प्रशासन ने आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए हैं ताकि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सके।
भयानक तबाही के आंकड़े
अब तक 1,342 मौतें और हजारों लापता
नेपाल प्रशासन की इस सतर्कता का कारण 26 अगस्त को आई भयंकर तबाही है, जिसने देश को हिला कर रख दिया था। रसुवा और नुवाकोट में भोटेकोशी नदी में आई 'हिमालयी सुनामी' और हालिया बाढ़-भूस्खलन में अब तक 1,342 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,886 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, चितवन, नवलपरासी, नुवाकोट और रसुवा सहित आठ प्रमुख जिलों से शव बरामद किए गए हैं। अब तक डीएनए जांच की कानूनी प्रक्रियाओं के बाद 1,030 शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। क्षेत्र में लगातार हो रही मानसूनी बारिश से पहाड़ और ढलानें बेहद कमजोर हो चुकी हैं, जिससे दार्चुला का यह नया भूस्खलन पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
