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नेपाल में विजयादशमी का पर्व: शक्ति की देवी की पूजा का उत्सव

नेपाल में विजयादशमी का पर्व शुरू हो गया है, जिसे ‘बड़ा दशईं’ के नाम से भी जाना जाता है। यह 10-दिवसीय उत्सव देवी दुर्गा की पूजा के साथ शुरू होता है, जिसमें भक्त शैलपुत्री की आराधना करते हैं। इस दौरान ‘जमारा’ की प्रक्रिया भी होती है, जिसमें जौ के बीज बोए जाते हैं। दशहरा के दिन, उगे जौ के अंकुरों को माथे पर टीका लगाने के लिए उपयोग किया जाएगा। जानें इस पर्व का महत्व और नेपाल में इसे मनाने की परंपराएँ।
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विजयादशमी का आगाज़

(शिरीष बी. प्रधान) काठमांडू, 11 अक्टूबर: नेपाल में रविवार को 10-दिवसीय हिंदू पर्व विजयादशमी की शुरुआत हुई, जिसे आमतौर पर ‘बड़ा दशईं’ के नाम से जाना जाता है। यह पर्व आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष के पहले दिन से प्रारंभ होता है। इस दिन ‘घटस्थापना’ का आयोजन किया गया।


देवी दुर्गा की पूजा

इस अवसर पर भक्तों ने देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक, शैलपुत्री की पूजा की। अन्य आठ देवियों में ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। पहले दिन ‘जमारा’ की तैयारी की जाती है।


जमारा की प्रक्रिया

इस प्रक्रिया में रेत और मिट्टी से भरे बर्तन में जौ के बीज बोए जाते हैं, जिससे अंकुर निकलते हैं। इस 10-दिवसीय उत्सव के दौरान शक्ति की देवी ‘दुर्गा भवानी’ की पूजा की जाती है। वैदिक मंत्रों के साथ बसंतपुर दरबार स्क्वायर में स्थित पुराने महल के हनुमानढोका दशईं घर में भी शुभ ‘जमारा’ उगाने की प्रक्रिया आरंभ होती है।


दशहरा का महत्व

इस वर्ष दशहरा 21 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जब पात्र में उगे जौ के अंकुरों को चावल और दही के साथ मिलाकर ‘टीका’ बनाया जाएगा, जिसे माथे पर लगाया जाएगा। इस अवसर पर बड़े-बुजुर्ग छोटे बच्चों को जौ के अंकुर देकर आशीर्वाद देते हैं। विजयादशमी बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है।


राष्ट्रीय त्योहार की छुट्टियाँ

इस राष्ट्रीय पर्व के दौरान सरकारी कार्यालय एक सप्ताह के लिए बंद रहते हैं, जबकि शिक्षण संस्थानों में लगभग दो सप्ताह की छुट्टी होती है। इसे ‘नवरात्र’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह नौ रातों और दस दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान नेपाल में भगवती के विभिन्न शक्तिपीठ मंदिरों में पशुओं की बलि भी दी जाती है।