पश्चिम एशिया में तनाव: अमेरिका और सऊदी अरब का ईरान समर्थित समूहों पर हवाई हमला
नई दिल्ली में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही टकराव की स्थिति अब अन्य देशों को भी सीधे प्रभावित कर रही है। हालिया घटनाक्रम में, अमेरिका और सऊदी अरब ने मिलकर इराक में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति इसी तरह बनी रही, तो आने वाले दिनों में संघर्ष और भी बढ़ सकता है।
ड्रोन हमलों का सिलसिला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, पिछले 72 घंटों में अमेरिकी और सऊदी सैन्य ठिकानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमले हुए थे। इन हमलों के जवाब में, दोनों देशों की वायुसेना ने इराक के पूर्वी हिस्से में कई हथियार भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का आरोप है कि इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हैं, जिन्हें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का समर्थन प्राप्त है। अमेरिकी सेना ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में ऐसे हमले जारी रहते हैं, तो जवाबी कार्रवाई भी जारी रहेगी।
सऊदी अरब का बयान
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उसके पूर्वी प्रांत में स्थित तेल प्रतिष्ठानों की ओर कई ड्रोन भेजे गए थे। हालांकि, देश की एयर डिफेंस प्रणाली ने सभी ड्रोन को रास्ते में ही नष्ट कर दिया, जिससे किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। सऊदी सरकार ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है।
इराक में विस्फोट की घटना
इसी बीच, इराक के बसरा प्रांत से एक बड़ी घटना सामने आई है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के मुख्यालय में विस्फोट हुआ है। PMF इराक में सक्रिय कई ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों का गठबंधन माना जाता है। फिलहाल विस्फोट के कारण और किसी संभावित नुकसान को लेकर आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।
ईरान का खंडन
दूसरी ओर, ईरान ने सऊदी अरब पर हुए ड्रोन हमलों से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि क्षेत्र में होने वाले हर हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उनका कहना है कि इससे वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज किया जा रहा है। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम होता नहीं दिख रहा है।
