पश्चिम एशिया में संघर्ष: ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ता संकट
संघर्ष का विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब खाड़ी से आगे बढ़कर यमन और सऊदी अरब तक पहुंच चुका है, जिससे दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर संकट गहरा गया है। हालिया जानकारी के अनुसार, ईरान और खाड़ी देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रस्तावित वार्ता स्थगित हो गई है, जबकि ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब पर एक और बड़ा हमला किया है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि तेहरान ने युद्ध को केवल सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे ऊर्जा, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने के एक उपकरण में बदल दिया है.
ईरान का दबाव
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 77 जहाजों की सूची जारी की है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने उसके नियमों का उल्लंघन किया है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इन जहाजों के भविष्य के आवागमन पर जुर्माना, हिरासत या जब्ती जैसी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा, इन जहाजों की सहायता करने वाले अन्य जहाजों को भी सूची में डालने की चेतावनी दी गई है।
समुद्री यातायात पर प्रभाव
इसका असर समुद्री यातायात पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। हाल ही में होर्मुज से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या घटकर प्रतिदिन एक अंक तक पहुंच गई, जबकि पहले यह औसतन 14 जहाज प्रतिदिन था। युद्ध शुरू होने से पहले इस जलडमरूमध्य से रोजाना लगभग 125 बड़े वाणिज्यिक जहाज गुजरते थे। यह मार्ग दुनिया के कुल दैनिक कच्चे तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का लगभग पांचवां हिस्सा प्रदान करता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा
इसका मतलब है कि होर्मुज पर ईरान का दबाव केवल अरब देशों के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा है। तेल आपूर्ति में मामूली व्यवधान भी कीमतों को बढ़ा सकता है, और लंबे समय तक संकट रहने पर महंगाई, परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर व्यापक असर पड़ सकता है।
हूती लड़ाकों का हमला
ईरान के इस दबाव के बीच, हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के खमीस मुशैत स्थित सैन्य अड्डे पर हमला किया। उन्होंने दर्जनों मिसाइलों और ड्रोन से हमले का दावा किया और इसे यमन पर सऊदी हवाई हमलों का जवाब बताया। सऊदी अरब ने अपने दक्षिणी क्षेत्रों में आपात चेतावनियां जारी की हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि युद्ध अब यमन के भीतर ही नहीं, बल्कि सीधे सऊदी क्षेत्र की सुरक्षा को भी चुनौती दे रहा है।
स्ट्रेटेजिक पेरिम द्वीप पर कब्जा
हूतियों ने लाल सागर के मुहाने पर स्थित रणनीतिक पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया है। यह द्वीप बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के भीतर है, जो यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच समुद्री व्यापार का एक प्रमुख केंद्र है। इस क्षेत्र पर नियंत्रण का अर्थ है कि ईरान समर्थित हूती अब केवल यमन में सैन्य शक्ति नहीं रह गए हैं, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार को प्रभावित करने की क्षमता रखने वाली ताकत बन गए हैं।
सऊदी अरब की चुनौतियाँ
सऊदी अरब की स्थिति और भी कठिन हो गई है क्योंकि उसने होर्मुज के संकट से बचने के लिए अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा लाल सागर के बंदरगाहों की ओर मोड़ दिया था। लेकिन हाल ही में उस पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन पर हमला हुआ, जिसे होर्मुज के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसके बंद होने से सऊदी तेल निर्यात के वैकल्पिक रास्ते पर भी खतरा पैदा हो गया है।
तेल बाजार पर प्रभाव
इसका सीधा असर तेल बाजार पर पड़ा है। आज बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। अमेरिका में डीजल की औसत खुदरा कीमत भी नए उच्च स्तर पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने हालांकि दावा किया है कि युद्ध इस वर्ष समाप्त हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका ईरान में लंबे समय तक मौजूद रहकर वहां के तेल संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखने के विकल्प पर विचार कर सकता है।
अमेरिकी नीति की उलझन
यह अमेरिकी नीति की सबसे बड़ी उलझन है। वाशिंगटन सऊदी अरब जैसे सहयोगियों को हूतियों से बचाना चाहता है, लेकिन यमन में सीधे उतरकर युद्ध का एक नया मोर्चा खोलने से भी बच रहा है। सऊदी नेतृत्व की ओर से हस्तक्षेप की मांग के बावजूद अमेरिका ने अब तक हूतियों के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखी है।
संघर्ष का सामरिक निष्कर्ष
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा रणनीतिक निष्कर्ष यही है कि ईरान ने युद्ध का भूगोल और युद्ध की कीमत दोनों बदल दी हैं। होर्मुज पर दबाव और बाब-अल-मंदेब में हूतियों की बढ़ती पकड़ मिलकर खाड़ी देशों के सामने बेहद कठिन विकल्प खड़ा कर रही है।
मानवीय संकट
इस संकट की मानवीय कीमत भी भयावह है। हूतियों के पश्चिमी यमन में तेजी से बढ़ते कब्जे के कारण हजारों लोग अपने घर छोड़कर विस्थापित शिविरों की ओर भाग रहे हैं। सितंबर की शुरुआत से ही 82 हजार से अधिक लोगों के विस्थापित होने का अनुमान है।
परमाणु तनाव
उधर, परमाणु मोर्चे पर भी तनाव कम नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षण व्यवस्था के साथ ईरान के संबंध लगातार बिगड़ रहे हैं और उसके परमाणु प्रमुख के अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सम्मेलन में शामिल होने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।
भविष्य की चुनौतियाँ
पश्चिम एशिया अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर खड़ा है जहां युद्ध की असली ताकत मिसाइलों से कहीं आगे बढ़ चुकी है। होर्मुज पर ईरान का शिकंजा, बाब-अल-मंदेब पर हूतियों की पकड़, सऊदी तेल ढांचे पर हमले और अमेरिका की अनिश्चित रणनीति, ये सभी मिलकर वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था को दबाव में ला रहे हैं। यदि यही सिलसिला जारी रहा, तो यह युद्ध केवल पश्चिम एशिया का युद्ध नहीं रहेगा; इसका अगला मोर्चा वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और दुनिया की महंगाई हो सकता है।
