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पश्चिम यूरोप में भीषण गर्मी से तापमान के रिकॉर्ड टूटे

जून का महीना आते ही पश्चिम यूरोप में भीषण गर्मी ने तापमान के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फ्रांस से लेकर ब्रिटेन तक, लोग गर्मी से राहत पाने के लिए झीलों और नदियों में जा रहे हैं, लेकिन इस दौरान कई लोगों की डूबने से मौत हो गई है। जानें इस गर्मी की लहर का प्रभाव और विभिन्न देशों में तापमान के नए रिकॉर्ड के बारे में।
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यूरोप में गर्मी का कहर

जून का महीना शुरू होते ही पश्चिम यूरोप में गर्मी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। फ्रांस में तापमान ने नए रिकॉर्ड स्थापित किए हैं, जिससे पूरे महाद्वीप में गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। इस समय, पंखों की दुकानों में ग्राहकों की भीड़ देखी जा रही है।


गर्मी की लहर का प्रभाव

फ्रांस से लेकर ब्रिटेन तक, भीषण गर्मी का सामना किया जा रहा है। लंदन, पेरिस और बोलिंजे जैसे शहरों में तापमान ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इस साल, यूरोप में दूसरी बार गर्मी की लहर ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में तापमान ने रिकॉर्ड स्तर को छू लिया है।


तापमान के नए रिकॉर्ड

पश्चिमी यूरोप में इस हफ्ते की शुरुआत में आई गर्मी की लहर ने मध्य और पूर्वी यूरोप तक अपना असर डाला। डेनमार्क में 1874 से तापमान का रिकॉर्ड रखने के बाद से सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां ओडुम में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। स्विट्ज़रलैंड के बेसल में 38.8 डिग्री सेल्सियस और चेक गणराज्य के डोक्सानी में 40.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। यूके में शुक्रवार को जून का अब तक का सबसे गर्म दिन रहा, जब तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।


गर्मी से राहत की कोशिशें

फ्रांस में गर्मी से राहत पाने के लिए झीलों, नदियों और नहरों में नहाने गए 40 से अधिक लोगों की डूबने से मौत हो गई है। श्रम मंत्री जान पियर फ़राडो ने फ्रांसीसी रेडियो से बात करते हुए कहा, "हम यह जान रहे हैं कि हम अब एक गर्म देश बन गए हैं।"