पाकिस्तान-ईरान सीमा बंद: LPG की किल्लत से बढ़ी महंगाई, आम परिवारों पर असर
पाकिस्तान और ईरान के बीच सीमा बंद
नई दिल्ली: पाकिस्तान और ईरान के बीच गब्द-रिमदान और तफ्तान बॉर्डर क्रॉसिंग 17 अक्टूबर से बंद हो गई हैं। बलूचिस्तान सरकार ने इसे सुरक्षा और तस्करी रोकने के लिए उठाया गया कदम बताया है, जबकि ईरान ने तकनीकी समस्याओं का हवाला दिया है। कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी दबाव की अटकलें भी सामने आई हैं, जिसे इस्लामाबाद ने खारिज कर दिया। इस बंद का सीधा प्रभाव पाकिस्तान के आम नागरिकों पर पड़ा है।
LPG की आपूर्ति में कमी
पाकिस्तान हर दिन ईरान से लगभग 7,000 टन LPG आयात करता है, जिसमें से 4,000 टन गब्द-रिमदान के माध्यम से आती थी। सीमा बंद होने के कारण सैकड़ों टैंकर दोनों तरफ फंस गए हैं। ईरानी पक्ष पर 4,500 टन से अधिक गैस अटकी हुई है, जिससे पाकिस्तान के बाजार में तुरंत किल्लत उत्पन्न हो गई है।
आयात पर निर्भरता
70% आयात पर निर्भर है पाकिस्तान
पाकिस्तान को हर साल लगभग 20 लाख टन LPG की आवश्यकता होती है, जिसमें से लगभग 70% आयात किया जाता है। केवल 30% का उत्पादन देश में होता है, जो रोजाना 2,000 से 2,500 टन है। ईरान सस्ता और निकटतम सप्लायर होने के कारण सबसे बड़ा स्रोत था। बंदरगाह से आयात महंगा और सीमित है, इसलिए पाकिस्तान की निर्भरता भूमि मार्ग पर अधिक थी। सीमा बंद होने से पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हुई है।
महंगाई का असर
12 किलो सिलेंडर 7,000 रुपये पार
किल्लत का असर कीमतों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। बंद के कुछ ही दिनों में 12 किलो के सिलेंडर की कीमत 4,500 रुपये से बढ़कर 7,000 रुपये हो गई। लाहौर में यह 7,500 रुपये और स्कार्दू जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में 8,200 रुपये तक पहुंच गया। कई शहरों में इससे भी अधिक कीमत पर बिक्री की खबरें आई हैं। आम परिवारों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है, क्योंकि खाना पकाने और हीटिंग के लिए LPG की आवश्यकता होती है, विशेषकर दूरदराज के क्षेत्रों में। कई स्थानों पर कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आई हैं।
सरकार पर दबाव
सरकार पर घरेलू उत्पादन बढ़ाने, वैकल्पिक आयात के रास्ते खोलने और कीमतों पर नियंत्रण रखने का दबाव बढ़ रहा है। उद्योग साप्ताहिक मूल्य निर्धारण की मांग कर रहा है। यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो महंगाई और बढ़ेगी, जिससे गरीब परिवारों पर और अधिक बोझ पड़ेगा।
