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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव: सीमा पर गोलाबारी की घटनाएं

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं, जहां गोलाबारी और आरोपों का सिलसिला जारी है। पाकिस्तान का दावा है कि अफगान तालिबान ने उनकी चौकियों पर फायरिंग की, जबकि काबुल ने पाकिस्तान पर घुसपैठ का आरोप लगाया है। जानें इस जटिल स्थिति के पीछे के कारण और दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के प्रभाव।
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पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर हालात बिगड़ चुके हैं। गोलियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं और तोपों की गड़गड़ाहट भी बढ़ गई है। पाकिस्तान का कहना है कि पहले घुसपैठ की कोशिश हुई, जिसके बाद उनकी चौकियों पर फायरिंग की गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अफगान लड़ाकों ने 21 सितंबर को हुए पाकिस्तानी हवाई हमले का प्रतिशोध लिया है? क्या इस घटना ने दोनों देशों के बीच तनाव को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है? रिपोर्टों के अनुसार, खुर्रम क्षेत्र में अफगान तालिबान और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच भारी गोलीबारी हुई है। पाकिस्तानी सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि फायरिंग अफगान क्षेत्र से की गई थी। पाकिस्तान का कहना है कि यह फायरिंग नरसंहार और प्रांतों से जुड़े इलाकों से हुई। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई की।


लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पाकिस्तान का आरोप है कि कुछ सशस्त्र लोग अफगानिस्तान से खैबर पख्तून ख्वा के खुर्रम क्षेत्र में घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे थे। पाकिस्तान ने इन लोगों को प्रतिबंधित तहरीक तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जोड़ा है। इसके बाद अफगान तालिबान पर पाकिस्तानी चौकियों पर फायरिंग करने का आरोप लगाया गया। पाकिस्तान इसे बिना किसी पूर्वाग्रह के कार्रवाई बता रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों का खंडन करता है।


पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच झड़पों का बढ़ता कारण क्या है? ये दोनों पड़ोसी देश, जो धर्म, जातीयता, भाषा और संस्कृति में समानता रखते हैं, कट्टर दुश्मन क्यों बन गए हैं? पाकिस्तान का दावा है कि वह धर्म के आधार पर बना है और इसी कारण से वह भारत से अलग है। फिर वह अफगानिस्तान के साथ शांति बनाए रखने की कोशिश क्यों नहीं करता, जहां भी सुन्नी इस्लाम को माना जाता है?


काबुल का दावा और जवाबी कार्रवाई

रविवार को काबुल ने यह दावा किया कि उसने 28 पाकिस्तानी लड़ाकों को मार गिराया है और 32 अन्य को घायल कर दिया है। काबुल का कहना है कि पाकिस्तान से एक सशस्त्र समूह अफगानिस्तान में घुसने के बाद नूरिस्तान प्रांत में लड़ाई शुरू हुई। अफगानिस्तान का आरोप है कि इस समूह में इस्लामिक स्टेट के सदस्य शामिल थे और उन्हें पाकिस्तान की सेना का समर्थन प्राप्त था। काबुल ने यह भी कहा कि कई लड़ाके पूर्व सरकार के सदस्य थे।


पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों की जटिलता

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल कुछ लोगों के जानबूझकर या अनजाने में अफगानिस्तान में घुसने का नहीं है। पाकिस्तान ने काबुल पर आरोप लगाया है कि वह पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है और जानबूझकर पाकिस्तान-विरोधी गुटों को अफगानिस्तान की जमीन से काम करने की अनुमति दे रहा है। दूसरी ओर, काबुल ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह सीमा पार आतंकवाद में शामिल है और देश को अस्थिर करने के लिए अपने सैनिक भेज रहा है। उसने इस्लामाबाद पर अफगानिस्तान में हवाई हमले करने और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया है। इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को पाकिस्तान में घुसने और तबाही मचाने की अनुमति देने का आरोप केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है। इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, क्योंकि IS फिर से संगठित होना चाहता है और न केवल पाकिस्तान में, बल्कि भारत में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है।