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पाकिस्तान और अफगानिस्तान तालिबान के बीच बढ़ता तनाव: क्या है नई रणनीति?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान तालिबान के बीच बढ़ते तनाव ने एक नई दिशा ले ली है, जिसमें पाकिस्तान ने तालिबान के खिलाफ एक नई रणनीति अपनाई है। रिपोर्टों के अनुसार, पाक सेना अफगानिस्तान के बिखरे हुए सैनिकों और स्थानीय लड़ाकों को भर्ती कर रही है। इस प्रक्रिया में आर्थिक प्रोत्साहन भी शामिल है। जानें इस संघर्ष की जड़ें और पाकिस्तान की पुरानी रणनीतियों के बारे में।
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तालिबान के खिलाफ पाकिस्तान की नई रणनीति


नई दिल्ली: पाकिस्तान और अफगानिस्तान तालिबान के बीच का तनाव अब सीधे युद्ध की ओर बढ़ रहा है, जो प्रॉक्सी वॉर में बदलता दिख रहा है। हाल ही में सीमा पर हुई लड़ाई में पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसमें सैकड़ों सैनिक मारे गए हैं। इसके बाद, पाक आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने तालिबान के खिलाफ एक नई रणनीति तैयार की है, जिसमें अफगानिस्तान के भीतर ही मोर्चा खोलने की योजना शामिल है।


तालिबान के खिलाफ लड़ाकों की भर्ती

रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना अफगानिस्तान की पूर्व सरकारी सेना के बिखरे हुए सैनिकों और स्थानीय कबायली लड़ाकों को एकत्रित कर रही है, ताकि उन्हें तालिबान के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार किया जा सके। एक मीडिया चैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि बलूचिस्तान के दालबंदिन में एक ट्रेनिंग कैंप स्थापित किया गया है। यहां प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद इन लड़ाकों को वापस अफगानिस्तान भेजा जाएगा। आने वाले समय में कुचलाक और क्वेटा में भी ऐसे कैंप शुरू होने की संभावना है।


भर्ती की प्रक्रिया और वेतन

15-20 हजार में लड़ाकों की भर्ती


एक बलूच पत्रकार के अनुसार, पाक सेना तालिबान के हमलों के बाद बिखरे हुए अफगान सैनिकों को पैसे का लालच देकर भर्ती कर रही है। स्थानीय नेताओं के लड़ाकों को भी इसमें शामिल किया जा रहा है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने इन लड़ाकों को 15 से 20 हजार रुपये प्रति माह वेतन देने का प्रस्ताव रखा है।


पाकिस्तान की पुरानी रणनीति

यह पाकिस्तान की पुरानी रणनीति है। 1980 के दशक में, अमेरिका के समर्थन से उसने सोवियत संघ के खिलाफ तालिबान को प्रशिक्षित किया था। बाद में, अमेरिका के साथ मिलकर उसी तालिबान के खिलाफ लड़ाई में शामिल हो गया। इस दोहरी नीति के कारण, अफगानिस्तान में कट्टरपंथी और उदारवादी दोनों ही पाकिस्तान से नफरत करते हैं।


डूरंड लाइन का विवाद

एक-दूसरे पर अस्थिरता फैलाने का आरोप


तालिबान और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कड़वाहट की एक बड़ी वजह डूरंड लाइन है। तालिबान सरकार का आरोप है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान को अस्थिर करना चाहता है, जबकि इस्लामाबाद का कहना है कि काबुल तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को समर्थन देकर पाकिस्तान में हमले करवा रहा है।


तालिबान के सत्ता में आने के बाद के रिश्ते

जब तालिबान पहली बार सत्ता में आया था, तब इस्लामाबाद और काबुल के रिश्ते अच्छे थे। लेकिन अमेरिकी हमले के बाद पाकिस्तान के अमेरिका के साथ जाने से सब कुछ बदल गया। इमरान खान ने अमेरिकी वापसी को गुलामी की जंजीर टूटने के रूप में देखा, लेकिन तालिबान ने दोस्ती का हाथ ठुकरा दिया। तब से सीमा पर गोलीबारी और तनाव आम हो गया है।