पाकिस्तान का नया 'सुन्नी नाटो' समझौता: क्या ईरान पर भरोसा कर पाएगा?
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की का नया रक्षा समझौता
नई दिल्ली: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में संपन्न मक्का रक्षा समझौते को विशेषज्ञ 'सुन्नी नाटो' के रूप में देख रहे हैं। इस संधि के अनुसार, यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस बीच, पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि शिया बहुल ईरान, सुन्नी गठबंधन में शामिल पाकिस्तान पर कैसे भरोसा करेगा?
'सुन्नी नाटो' समझौते का विवरण
हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मक्का में सामूहिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। सऊदी और तुर्की दोनों सुन्नी बहुल देश हैं, और पाकिस्तान इस समझौते का एक महत्वपूर्ण भागीदार है। इस संधि के बाद क्षेत्र में ध्रुवीकरण की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
इस बीच, ईरान समर्थित हूती विद्रोही लगातार सऊदी ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। ईरान ने भी अमेरिका के हमलों के जवाब में सऊदी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इसी तनाव के बीच, पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश
पाकिस्तान ने पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने का प्रयास किया था। इस्लामाबाद में एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, लेकिन वह प्रयास कुछ ही हफ्तों में विफल हो गया। अब पाकिस्तान एक बार फिर इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
इस सिलसिले में, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी तेहरान पहुंचे हैं। नकवी, शहबाज शरीफ की कैबिनेट के एकमात्र शिया मंत्री हैं। तेहरान में उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन से मुलाकात की और दोनों देशों के रिश्तों को 'मजबूत और अटूट' बताया।
पाकिस्तान की चुनौतीपूर्ण स्थिति
पाकिस्तान के लिए इस संतुलन को साधना आसान नहीं है। एक ओर, वह ईरान के साथ 900 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है, और दूसरी ओर, पाकिस्तान में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी शिया आबादी निवास करती है। इसलिए इस्लामाबाद किसी भी कीमत पर ईरान से दुश्मनी नहीं चाहता। वहीं, सऊदी अरब और तुर्की के साथ उसका नया रक्षा गठबंधन भी है। इस कारण, ईरान के मन में पाकिस्तान की नीयत को लेकर संदेह होना स्वाभाविक है।
इस्लामाबाद की 'ईमानदार कोशिश'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान क्षेत्रीय देशों की मदद से अमेरिका-ईरान विवाद को सुलझाने के लिए 'ईमानदारी से कोशिश' कर रहा है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान सीधे और परोक्ष तरीकों से बातचीत को आगे बढ़ाएगा।
ईरानी राष्ट्रपति ने भी कहा कि ईरान-पाकिस्तान संबंध दोनों देशों के हितों और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक हैं। अब देखना होगा कि 'सुन्नी नाटो' का सदस्य होने के बावजूद पाकिस्तान शिया ईरान का विश्वास जीत पाता है या नहीं। क्योंकि बिना तेहरान के विश्वास के, अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की कोई भी कोशिश अधूरी रह जाएगी।
