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पाकिस्तान की दुविधा: ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव

पाकिस्तान ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में सऊदी अरब को बचाने के लिए प्रयास किए हैं। हालिया घटनाओं ने पाकिस्तान को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है, जहां उसे ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच संतुलन बनाना है। जानें कैसे ये घटनाएँ पाकिस्तान की सुरक्षा और ऊर्जा संकट को प्रभावित कर रही हैं।
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पाकिस्तान की कोशिशें और बदलते समीकरण

पाकिस्तान ने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में सऊदी अरब को निशाना बनने से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया है। पिछले पांच महीनों में उसकी ये कोशिशें सफल भी रही हैं। पहले चरण के संघर्ष में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात को सबसे अधिक निशाना बनाया। जब अमेरिका ने सीजफायर के दौरान फिर से हमले शुरू किए, तो जॉर्डन, कतर, कुवैत और बहरीन भी प्रभावित हुए। लेकिन 13 जुलाई को एक घटना ने सभी समीकरणों को बदल दिया, जिससे सऊदी अरब को एक नई सुरक्षा चुनौती का सामना करना पड़ा और पाकिस्तान भी एक कठिन स्थिति में फंस गया।


हूती विद्रोहियों का तेहरान दौरा

तीन जुलाई को यमन के हूती विद्रोहियों का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा, जहां उन्होंने अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भाग लिया। 13 जुलाई को जब यह प्रतिनिधिमंडल ईरान की एयरलाइन से वापस लौट रहा था, तो सऊदी अरब समर्थित यमन की सरकार ने रनवे पर हमला कर दिया। इस हमले के कारण हूती विद्रोहियों को विमान को मोड़कर होदेइदा एयरपोर्ट पर उतारना पड़ा।


पाकिस्तान की चेतावनी

हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर बैलेस्टिक मिसाइल दागे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। पाकिस्तान ने सऊदी अरब का समर्थन करते हुए हूती विद्रोहियों को चेतावनी दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने ईरान को एक संदेश भेजा, जिसमें कहा गया कि सऊदी अरब उसकी रेड लाइन है। अगर रियाद पर हमला हुआ, तो पाकिस्तान के पास कोई विकल्प नहीं बचेगा।


हूती विद्रोहियों की प्रतिक्रिया

हूती विद्रोहियों ने पाकिस्तान की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ नाकेबंदी का ऐलान किया। 23 जुलाई को उन्होंने सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला किया, जिससे पाकिस्तान की दुविधा और बढ़ गई। अमेरिका ने भी हूती विद्रोहियों और ईरान को परिणाम भुगतने की धमकी दी, जबकि पाकिस्तान के नेतृत्व ने चुप्पी साध ली।


पाकिस्तान की चिंताएँ

पाकिस्तान की सेना और सरकार को चिंता है कि ईरान के संघर्ष में उसे भी शामिल किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने का पाकिस्तान का सपना चूर हो जाएगा।


संघर्ष में पाकिस्तान की भागीदारी का खतरा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब में पाकिस्तान के हजारों सैनिक और फाइटर जेट की एक स्क्वाड्रन तैनात है। विशेषज्ञों का मानना है कि हूती विद्रोहियों के हालिया हमले के बाद पाकिस्तान के संघर्ष में शामिल होने का खतरा बढ़ गया है।


घरेलू चुनौतियाँ

पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को डर है कि अगर हूती विद्रोहियों के साथ संघर्ष बढ़ता है, तो उसे भी जंग में शामिल होना पड़ेगा। यह तब हो रहा है जब पाकिस्तान घरेलू स्तर पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।


पड़ोसी देशों के साथ तनाव

पाकिस्तान के पड़ोसी देशों के साथ भी रिश्ते अच्छे नहीं हैं। अफगानिस्तान के साथ संबंध खराब हैं, और भारत के साथ तनाव बढ़ा हुआ है। पाकिस्तान को यह भी चिंता है कि अगर वह हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग में शामिल होता है, तो ईरान के साथ भी संघर्ष हो सकता है।


ऊर्जा संकट का खतरा

पाकिस्तान किसी भी हाल में ईरान के साथ संबंध नहीं बिगाड़ना चाहता, लेकिन खाड़ी देशों के साथ संतुलन भी बनाए रखना चाहता है। सऊदी अरब पाकिस्तान का एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोगी है। हूती विद्रोहियों की नाकेबंदी से पाकिस्तान के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है, जो उसे जंग में खींच सकता है।