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पाकिस्तान की शांति वार्ता में नई पहल: ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को पुनर्जीवित करने के लिए नई पहल की है। उन्होंने ईरान और कतर के नेताओं से बातचीत की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। जानें इस वार्ता के पीछे की वजहें और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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शांति वार्ता की नई कोशिशें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को पुनर्जीवित करने का प्रयास शुरू किया है। वह ईरान और कतर के नेताओं से अलग-अलग फोन पर बातचीत कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू किया जा सके। पाकिस्तान ने पहले भी इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, लेकिन यह वार्ता पहले रद्द हो चुकी थी.


शांति बहाली की दिशा में प्रयास

पाकिस्तान की पहल के चलते शांति बहाल करने के प्रयासों में तेजी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान शांति वार्ता के लिए इच्छुक है, जबकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया था। ईरान ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वह किसी भी हमले का जवाब देगा.


ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की। उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को तुरंत बहाल करना आवश्यक है.


शहबाज शरीफ की अपील

शहबाज शरीफ ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की और कहा कि कोई भी ऐसा कदम न उठाएं जिससे हाल के महीनों में शांति के लिए हुई प्रगति को खतरा हो। उन्होंने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने पर जोर दिया.


ईरान का दृष्टिकोण

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शांति के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता को दोहराया और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पाकिस्तान के सहयोग की सराहना की। दोनों नेताओं ने पिछले महीने पेजेश्कियन की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान लिए गए निर्णयों की समीक्षा की.


कतर के अमीर से बातचीत

प्रधानमंत्री शरीफ ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से भी फोन पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की.


समझौते में संकट

इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब संकट में है। अमेरिका और ईरान ने 18 जून को पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए इस पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 21 जून को स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता हुई, जिसमें पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। हाल ही में दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है.


तनाव की स्थिति

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को मार डाला। उनकी लाश को 9 जुलाई को दफनाया गया। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया। जुलाई में ईरान ने एक व्यापारिक विमान पर हमला किया, जिसके जवाब में अमेरिका ने भी कार्रवाई की। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि यह समझौता अब समाप्त हो चुका है। अब पाकिस्तान एक बार फिर शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहा है.