पाकिस्तान की सऊदी अरब के साथ रक्षा साझेदारी: क्या होगा अमेरिका-ईरान तनाव के बीच?
पाकिस्तान की मध्यस्थता और सऊदी अरब के साथ संबंध
नई दिल्ली: पाकिस्तान ने इस वर्ष अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभाने का प्रयास किया है। साथ ही, उसने सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा संबंधों को भी मजबूत किया है। हालाँकि, सऊदी अरब और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच हालिया संघर्ष ने इस्लामाबाद की संतुलन साधने की रणनीति को चुनौती दी है।
सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के संबंध
सऊदी अरब पाकिस्तान के लिए केवल एक करीबी सहयोगी नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे रक्षा संबंध भी हैं। हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद, इस्लामाबाद पर रियाद के समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाने का दबाव बढ़ गया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में भी सक्रिय है।
शहबाज शरीफ की सऊदी क्राउन प्रिंस से बातचीत
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हालात को संभालने के लिए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर चर्चा की। इस बातचीत में उन्होंने हूती हमलों की कड़ी निंदा की और सऊदी अरब के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, शरीफ ने कहा कि ऐसे हमले न केवल सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी गंभीर खतरा हैं।
यह बातचीत उस समय हुई जब सऊदी अरब ने ड्रोन हमले के बाद अपनी 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। यह पाइपलाइन सऊदी तेल को होर्मुज जलडमरूमध्य से बचाकर लाल सागर तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग है।
रक्षा सहयोग की पहली बड़ी परीक्षा
सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत किया गया है। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए समझौते में यह तय किया गया था कि यदि इनमें से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो इसे सभी पर हमला माना जाएगा।
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, हूती हमलों में दो लोग घायल हुए और कई इमारतों को नुकसान पहुंचा। अब पाकिस्तान के सामने चुनौती है कि वह अपने सऊदी रक्षा सहयोग को निभाते हुए अमेरिका-ईरान के बीच अपनी कूटनीतिक भूमिका को कैसे बनाए रखता है।
