पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताएँ: ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव
ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव
ऑपरेशन सिंदूर का अनुभव आज भी मुल्ला मुनीर के मन में ताजा है। भारत ने मई 2025 में ऐसा प्रतिरोध किया कि उसकी गूंज अब भी इस्लामाबाद के राजनीतिक गलियारों में सुनाई देती है। 7 से 10 मई 2025 तक चले इस ऑपरेशन की रातें पाकिस्तान के रणनीतिकारों को आज भी परेशान करती हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान में तुर्की के ड्रोन किलर सिस्टम, अमेरिकी टीपीएस 777 रडार और एयर डिफेंस नेटवर्क के उन्नयन की खबरें लगातार आ रही हैं।
हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने तुर्की का अत्याधुनिक एएसईएल एसए एन शाहीन 40 एमएम काउंटर यूएएस सिस्टम तैनात करना शुरू कर दिया है। इसे आमतौर पर ड्रोन किलर कहा जाता है। लेकिन यह केवल एक नए हथियार की कहानी नहीं है।
यह दरअसल पाकिस्तान की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं का संकेत है। कई रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव आज भी पाकिस्तान की सुरक्षा रणनीति में स्पष्ट है। यही वजह है कि एक साल बाद भी वह नए एयर डिफेंस सिस्टम, रडार और एंटी ड्रोन समाधानों की खोज में लगा हुआ है। पाकिस्तान की कोशिश है कि भविष्य में किसी भी संभावित खतरे के सामने उसकी कमजोरियां उजागर न हों।
रिपोर्ट्स के अनुसार, तुर्की का शाहीन सिस्टम केवल ड्रोन को बाधित नहीं करता, बल्कि उन्हें हवा में ही नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें 40 एमएम का प्रोग्रामेबल एटम गोला बारूद होता है, जो लक्ष्य के निकट पहुंचकर हवा में ही फटता है। इसी कारण इसे ड्रोन किलर कहा जाता है।
हाल ही में मीडिया में यह भी दावा किया गया कि किराना हिल्स जैसे रणनीतिक स्थान पर अमेरिकी टीपीएस 77 लॉन्ग रेंज रडार तैनात किया गया है, जहां पहले चीनी डिफेंस सिस्टम था। इसका मतलब है कि पाकिस्तान केवल तुर्की के सिस्टम पर निर्भर नहीं है, बल्कि अपनी पूरी निगरानी और एयर डिफेंस व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने हाल के वर्षों में ड्रोन, मिसाइल और निगरानी तकनीक में जो प्रगति की है, उसने पाकिस्तान को अपनी सुरक्षा रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। भारत की बढ़ती क्षमताओं से पाकिस्तान की चिंता बढ़ती जा रही है। इसीलिए इस्लामाबाद नए सुरक्षा उपायों की तलाश में है।
