पाकिस्तान की सैन्य ताकत: चीन और तुर्की से मिल रहे हैं नए हथियार
पाकिस्तान की नई सैन्य क्षमताएं
नई दिल्ली: पाकिस्तान अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए चीन और तुर्की से प्राप्त हथियारों और रक्षा तकनीकों पर काफी निर्भरता दिखा रहा है। हाल ही में, पाकिस्तान एयर फोर्स (PAF) ने अपने नए एयर डिफेंस क्षमताओं का प्रदर्शन किया, जिसमें चीन और तुर्की से जुड़े कई हथियार और सैन्य प्रणालियां शामिल थीं। यह दिखाता है कि विदेशी सहयोग पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस प्रदर्शनी में कम दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली HQ-17 AE मिसाइल प्रणाली भी शामिल थी। इसके अलावा, तुर्की के काउंटर-यूएवी सिस्टम और स्वचालित एंटी-एयरक्राफ्ट गन भी प्रदर्शित की गईं। पाकिस्तान के वायुसेना के बेड़े में पहले से ही चीनी J-10 और JF-17 लड़ाकू विमान शामिल हैं। इसके साथ ही, तुर्की और चीन के अकिंसी तथा विंग लोंग II सशस्त्र ड्रोन भी उसकी सैन्य क्षमताओं का हिस्सा हैं। यह भी बताया गया है कि विंग लोंग II ड्रोन का उपयोग बलूचिस्तान में विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई में किया गया है।
हथियारों की खरीद पर उठते सवाल
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लंबे समय से चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जिससे विदेशी हथियारों की खरीद पर सवाल उठते रहे हैं। रिपोर्टों में यह संभावना जताई गई है कि सऊदी अरब, अमेरिका के साथ बढ़ते संबंध या चीन के साथ बड़े बुनियादी ढांचे के समझौते जैसे विकल्प इन रक्षा सौदों में मदद कर सकते हैं। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद, पाकिस्तान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया है, जिसमें मिसाइलों, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम की खरीद के साथ-साथ नौसेना को सशक्त बनाने की कोशिश भी शामिल है। चीन से मिलने वाली युआन-क्लास पनडुब्बियां और गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट इसी योजना का हिस्सा माने जाते हैं।
भारत का ध्यान स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर
वहीं, भारत अपनी रक्षा आवश्यकताओं के लिए स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता दे रहा है। लंबी दूरी के लोइटरिंग एम्युनिशन और ड्रोन जैसी क्षमताओं को तेजी से विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। निजी कंपनियों को भी रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
अमेरिका से 31 MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन की खरीद में देरी के कारण, भारत घरेलू स्तर पर यूएवी और यूसीएवी क्षमताओं को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके अलावा, 250 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने वाली बियॉंड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है। रूस की RVV-BD मिसाइलों के साथ Su-30MKI की क्षमता बढ़ाने और भविष्य में लंबी दूरी की स्वदेशी अस्त्र मिसाइल विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। भारत लंबी दूरी के एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर के परीक्षण की तैयारी भी कर रहा है।
