पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 70,000 लोगों का प्रदर्शन: महिलाएं और बच्चे भी शामिल
रावलकोट में जारी है विरोध प्रदर्शन
नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में असंतोष की लहर थमने का नाम नहीं ले रही है। रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में पिछले 11 दिनों से 70,000 से अधिक लोग एकत्रित हैं और यह प्रदर्शन लगातार 14वें दिन भी जारी है। प्रदर्शनकारी आजादी के नारे लगाते हुए पाकिस्तान के कब्जे का विरोध कर रहे हैं।
महिलाओं और बच्चों की सक्रिय भागीदारी
इस बार के आंदोलन में महिलाओं और बच्चों की भागीदारी ने विशेष ध्यान आकर्षित किया है। सुधनोती जिले के तरार खेल में 10 से 12 साल के बच्चे चौराहे पर इकट्ठा होकर आजादी के नारे लगा रहे हैं। मंढोल क्षेत्र में सैकड़ों महिलाएं मार्च निकालकर पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं।
रावलकोट के मुख्य प्रदर्शन स्थल पर बच्चे तख्तियां लेकर आए हैं, जिन पर लिखा है, 'पाकिस्तान सेना वापस जाओ', 'कश्मीरियों पर हमला बंद करो', 'हमें बुनियादी अधिकार दो', और 'मुफ्त शिक्षा चाहिए'। बच्चों की इस भागीदारी को युवा पीढ़ी की बढ़ती नाराजगी का संकेत माना जा रहा है।
सरदार अमन खान की चेतावनी
आंदोलन के प्रमुख आयोजक सरदार अमन खान ने रावलकोट में हजारों लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि PoK के निवासियों के पास अब भी विकल्प हैं और पाकिस्तान की रणनीति की गुंजाइश कम होती जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान सेना अत्याचार जारी रखती है, तो मिलिट्री सिस्टम को PoK से बाहर कर दिया जाएगा।
उन्होंने पाकिस्तानी सेना पर जातीय समूहों के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया। बंगालियों, बलूच और पश्तून समुदायों पर हो रहे दबाव का जिक्र करते हुए कहा कि कश्मीरी इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरदार अमन ने स्पष्ट कहा, 'अगर कश्मीरी PoK में नहीं रह सकते, तो पाकिस्तानी सेना भी नहीं रह पाएगी।'
AAC द्वारा 38 मांगों का चार्टर
यह आंदोलन अवामी एक्शन कमेटी (AAC) के नेतृत्व में चल रहा है। कमेटी ने पाकिस्तान सरकार को 38 मांगों का चार्टर सौंपा है और 23 जून तक का समय दिया है। नेताओं का कहना है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो रावलकोट से मुजफ्फराबाद तक बड़ा मार्च निकाला जाएगा, जिसमें लाखों लोग शामिल हो सकते हैं।
AAC नेताओं ने चेतावनी दी है कि मार्च के दौरान वे मुजफ्फराबाद में संस्थानों पर लोगों का नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश करेंगे। सरदार अमन ने कहा कि मुजफ्फराबाद में सरकार अवामी एक्शन कमेटी की होगी। उन्होंने इस आंदोलन की तुलना नेपाल और बांग्लादेश में हुए बदलावों से की है।
इंटेलिजेंस सूत्रों के अनुसार, PoK के कई कस्बों और गांवों में भी नए विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। लोगों का कहना है कि कब्जे और अधिकारों की कमी के चलते अब चुप बैठना संभव नहीं है।
