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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 70,000 से अधिक लोगों का प्रदर्शन

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 70,000 से अधिक लोग सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। यह आंदोलन पिछले 14 दिनों से जारी है, जिसमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी आजादी की मांग कर रहे हैं और पाकिस्तान की सेना के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। इस स्थिति ने क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक तनाव को बढ़ा दिया है। जानें इस आंदोलन के पीछे की वजहें और प्रदर्शनकारियों की मांगें।
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 70,000 से अधिक लोगों का प्रदर्शन

पाकिस्तान सरकार के खिलाफ उभरा जनाक्रोश

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अब 70,000 से ज्यादा लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि लोग सरकार के खिलाफ कितने अधिक नाराज हैं। पाकिस्तान की सरकार ने जिस तरह से कश्मीर में अपने शासन को बनाए रखने के लिए आम नागरिकों पर अत्याचार किया है, उसके खिलाफ अब जनता ने एकजुट होकर आवाज उठाई है। पिछले 14 दिनों से कश्मीर में यह गुस्सा स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। हर कश्मीरी का आक्रोश इस आंदोलन में झलक रहा है, और लोग अब अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं, चाहे इसके लिए उन्हें जान भी क्यों न देनी पड़े।


हर वर्ग का समर्थन

इस आंदोलन में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हैं। हर कोई एकजुट होकर आजादी की मांग कर रहा है और पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी कर रहा है। रावलकोट के ईदगाह ग्राउंड में पिछले 11 दिनों से 70,000 से अधिक प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं, जो यह दर्शाता है कि स्थिति सामान्य नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जो शांति की बात कर रहे हैं, उनके अपने कब्जे वाले क्षेत्र में विद्रोह की लहर चल रही है।


नए विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत

सूत्रों के अनुसार, कई कस्बों और गांवों में नए विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सुधनोती जिले के तरार खेल में 10 से 12 साल के स्कूली बच्चे सार्वजनिक चौराहों पर इकट्ठा होकर आजादी के नारे लगा रहे हैं। मढोल क्षेत्र में सैकड़ों महिलाओं ने मार्च निकाला और पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रावलकोट के मुख्य प्रदर्शन स्थल पर कई स्कूली बच्चे तख्तियां लेकर आए, जिन पर लिखा था कि पाकिस्तानी सेना बाहर जाए।


बुनियादी अधिकारों की मांग

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तानी सेना कश्मीरियों पर अत्याचार कर रही है। उन्हें बुनियादी अधिकारों की आवश्यकता है, जैसे मुफ्त शिक्षा। बच्चों की इस आंदोलन में भागीदारी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो दर्शाता है कि युवा पीढ़ी पाकिस्तान के कब्जे के खिलाफ आवाज उठा रही है। इस आंदोलन के प्रमुख आयोजक सरदार अमन खान ने हजारों लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान के किसी भी नेता को कश्मीर की गलियों में आने का अधिकार नहीं है।