पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पूर्व कमांडो की मौत: क्या है असली कहानी?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विवादास्पद मौत
नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच एक पूर्व पाकिस्तानी सैन्य कमांडो की मृत्यु ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फारूक खान, जिसे कमांडर फारूक सुधन के नाम से भी जाना जाता है, की मौत पाकिस्तानी रेंजर्स की गोली लगने से हुई।
विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई गोलीबारी
सूत्रों के अनुसार, 27 जुलाई को रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक आयोजित एक रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव बढ़ गया। इसी दौरान फारूक खान को गोली लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। हाल के महीनों में, वह पाकिस्तान सरकार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों का समर्थन कर रहे थे और उनमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे।
आतंकी संगठनों से संबंध
फारूक खान का नाम जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF), हिज्बुल मुजाहिदीन और हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HUJI) जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़ा हुआ है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, वह उन प्रशिक्षण शिविरों से भी जुड़ा था, जहां आतंकियों को भारत में घुसपैठ के लिए प्रशिक्षित किया जाता था।
कहा जाता है कि उसने लंबे समय तक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सक्रिय प्रशिक्षण शिविरों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में JKLF की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया।
तस्वीरों पर उठे सवाल
कुछ ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) प्लेटफार्मों ने फारूक खान की पुरानी तस्वीरें साझा की हैं, जिनमें उन्हें हथियारबंद लोगों को प्रशिक्षण देते हुए दिखाया गया है। हालांकि, इन तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फारूक खान की मौत पर उठते सवाल
फारूक खान की मृत्यु के बाद स्थानीय स्तर पर कई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे पाकिस्तान की नीतियों की आलोचना का परिणाम मानते हैं, जबकि अन्य इसे प्रदर्शन के दौरान हुई गोलीबारी का नतीजा बता रहे हैं।
इस मामले पर पाकिस्तान की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह घटना एक बार फिर PoK में असंतोष, सुरक्षा स्थिति और पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठाती है।
