पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बढ़ते तनाव के बीच JAAC पर प्रतिबंध
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं
नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात पिछले कुछ दिनों से काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। शुरुआत में स्थानीय लोगों ने महंगाई, सस्ते आटे की कमी और बिजली की दरों में वृद्धि के खिलाफ आवाज उठाई थी। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) नामक संगठन ने इन मुद्दों को लेकर आंदोलन शुरू किया, जिसे व्यापक समर्थन मिला।
धीरे-धीरे यह आंदोलन केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक मांगों की ओर भी बढ़ गया। अब प्रदर्शनकारी प्रशासनिक सुधार और राजनीतिक हस्तक्षेप समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।
JAAC पर प्रतिबंध से स्थिति और बिगड़ी
PoK सरकार ने JAAC को गैर-कानूनी संगठन घोषित कर उस पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रशासन का कहना है कि यह संगठन क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, JAAC के चार नेताओं की गिरफ्तारी के लिए इनाम भी घोषित किया गया है, जिनमें शौकत नवाज मीर, उमर नजीर कश्मीरी, मेहरान अरशद ख्वाजा और सरदार अमन शामिल हैं।
आरक्षित सीटों को लेकर विवाद गहरा
इस विवाद का मुख्य कारण PoJK विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें बन गई हैं। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए निर्धारित की गई थीं, जो 1947 के बाद पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां इन सीटों का उपयोग अपनी पसंद की सरकार बनाने के लिए करती हैं। JAAC का कहना है कि इन सीटों को समाप्त कर निष्पक्ष राजनीतिक व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
बंद और झड़पों का दौर
मुजफ्फरबाद, मीरपुर और कोटली जैसे कई क्षेत्रों में बंद का असर देखा गया। बाजार बंद रहे और सड़कों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। रावलकोट सहित कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं।
इन घटनाओं के बाद पाकिस्तान सरकार ने अतिरिक्त अर्धसैनिक बल तैनात किए हैं। वहीं, PoK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध
PoK में चल रही कार्रवाई के खिलाफ विदेशों में रह रहे कश्मीरी समुदाय ने भी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में पाकिस्तानी वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया गया। कई ब्रिटिश सांसदों ने भी पाकिस्तान सरकार से संयम बरतने और मामले के शांतिपूर्ण समाधान की मांग की है।
