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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में विद्रोह की लहर: प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालिया विरोध प्रदर्शन ने गंभीर मोड़ ले लिया है, जहां प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं। रावलकोट से मुजफराबाद तक, लोग अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरे हैं, लेकिन पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन पर बर्बरता दिखाई। भारत ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को दुनिया के सामने अपराधी घोषित किया है। जानें इस विद्रोह की पृष्ठभूमि और भारत की प्रतिक्रिया के बारे में।
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बढ़ते विरोध

क्या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में अंत की शुरुआत हो चुकी है? यह क्षेत्र, जिसे पाकिस्तान ने वर्षों से अपनी संपत्ति समझा, अब उसके हाथ से फिसलता नजर आ रहा है। रावलकोट से मुजफराबाद तक सड़कों पर खून बह रहा है, बारूद का धुआं छाया हुआ है, और एक ही मांग गूंज रही है - पाकिस्तानी दमन से आजादी। निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने गोलियां चलाईं, जिसमें आठ निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ एक व्यापक विद्रोह है। इस बीच, भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने इस्लामाबाद की सत्ता को हिला दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तान को दुनिया के सामने अपराधी घोषित किया।


शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर दमन

रावलकोट बस स्टैंड पर हजारों लोग, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे, शांतिपूर्ण जन मार्च के लिए इकट्ठा हुए थे। उनका उद्देश्य मुजफराबाद पहुंचकर अपनी 38 सूत्री मांगों को सरकार के सामने रखना था। लेकिन पाकिस्तानी सरकार को शांति नहीं, बल्कि दमन पसंद था। पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, और जब लोग पीछे नहीं हटे, तो रेंजर्स ने असली गोलियां चलानी शुरू कर दी।


बर्बरता और गुस्से का कारण

सुधा नोटी इलाके में भी यही बर्बरता देखने को मिली, जहां पाकिस्तानी सेना ने पीओजेके के लोगों को निशाना बनाया। इस हिंसा में आठ परिवारों के सदस्य मारे गए और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए। यह गुस्सा एक दिन का नहीं है, बल्कि महीनों से बिजली की बढ़ती कीमतों और आटे की कमी के कारण शुरू हुआ। जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी ने जब यह आंदोलन शुरू किया, तो उनकी मांगें बुनियादी थीं। लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने बातचीत के बजाय आतंकवाद विरोधी कानून का सहारा लिया।


भारत का कड़ा रुख

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि पीओजेके में हो रही घटनाएं पाकिस्तान के दशकों पुराने शोषण का परिणाम हैं। भारत ने वैश्विक समुदाय को बताया कि पाकिस्तान ने इस अवैध कब्जे वाले क्षेत्र में लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। भारत का यह बयान महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दर्शाता है कि पाकिस्तान अब अपने ही कब्जे वाले इलाके को संभालने में असफल है। मुजफराबाद की ओर जाने वाले रास्तों पर पाकिस्तान ने कंटेनर लगा दिए हैं और सेना तैनात कर दी है, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं है। 15 जुलाई का मार्च निर्णायक साबित होने वाला है।