पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनावों पर अमजद अयूब मिर्जा की आलोचना
पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनावों की समीक्षा
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) में प्रस्तावित स्थानीय निकाय चुनावों की तीखी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया वास्तविक लोकतांत्रिक सशक्तिकरण के बिना केवल एक राजनीतिक ढांचे का निर्माण कर सकती है। यूट्यूब पर साझा किए गए एक वीडियो में, मिर्जा ने यह सवाल उठाया कि क्या 5 दिसंबर, 2026 को होने वाले चुनाव वास्तव में निर्वाचित प्रतिनिधियों को अधिकार देंगे, या यह केवल पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था का एक दिखावा होगा।
उन्होंने स्थानीय पार्षदों, परिषदों और मेयरों को दिए जाने वाले अधिकारों की अस्पष्टता पर भी चिंता जताई। मिर्जा ने यह भी पूछा कि क्या निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्थानीय मुद्दों के समाधान के लिए पर्याप्त अधिकार और विकास निधि प्राप्त होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि केवल चुनाव कराना लोकतांत्रिक शासन की गारंटी नहीं है।
मिर्जा ने प्रस्तावित चुनावों की तुलना PoJK में 33 वर्षों के बाद हुए स्थानीय निकाय चुनावों से की। उनका कहना है कि वहां पार्षदों को बिना पर्याप्त शक्तियों या विकास निधि के काम करना पड़ा, जबकि असली शक्ति अन्य स्थानों पर केंद्रित रही। उन्होंने 'जॉइंट अवामी एक्शन कमिटी' (JAAC) की मांगों का भी उल्लेख किया, जिसमें 12 विधानसभा सीटों को समाप्त करने की मांग शामिल है। उनका आरोप है कि इन सीटों का उपयोग सरकार बनाने की प्रक्रिया और राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने के लिए किया जाता था।
PoGB के राजनीतिक हालात पर चर्चा करते हुए, मिर्जा ने कार्यकर्ता अहसान अली एडवोकेट और बाबा जान का उल्लेख किया। उन्होंने इस क्षेत्र में अधिकारों की मांग से जुड़े राजनीतिक आंदोलनों और जेल जाने के इतिहास को रेखांकित किया। मिर्जा ने तर्क किया कि विभिन्न राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोणों के टकराव ने PoGB के राजनीतिक भविष्य पर केंद्रित एकजुट आंदोलन के विकास में बाधा डाली है।
