पाकिस्तान के गृह मंत्री का चौंकाने वाला बयान: क्या सच में खत्म हो चुका है सिस्टम?
पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल
नई दिल्ली: पाकिस्तान, जो आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है, से एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी है। यह चौंकाने वाला कबूलनामा किसी विपक्षी नेता द्वारा नहीं, बल्कि खुद गृह मंत्री मोहसिन नकवी द्वारा किया गया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि पाकिस्तान की वर्तमान शासन प्रणाली पूरी तरह से विफल हो चुकी है और पिछले 70 वर्षों से चल रहा प्रशासनिक ढांचा अब अप्रासंगिक हो गया है।
जनता का समर्थन
बयान पर जनता ने बजाई तालियां
सबसे आश्चर्यजनक यह है कि जब गृह मंत्री ने सिस्टम की विफलता की बात की, तब वहां मौजूद जनता ने तालियों के साथ उनका समर्थन किया। यह राजनीतिक हलकों में असामान्य माना जा रहा है कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति ने अपनी ही सरकार की असफलता को स्वीकार किया। आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे संवेदनशील मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे मंत्री की यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान की संवैधानिक और प्रशासनिक संस्थाएं कितनी कमजोर हो चुकी हैं।
आर्थिक संकट की गंभीरता
कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसा पाकिस्तान
नकवी का यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। देश पर कुल विदेशी कर्ज का बोझ लगभग 137 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का हिस्सा 8.8 अरब डॉलर है। सरकारी कर्ज देश की जीडीपी के 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद खतरनाक है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि सरकार का बजट का लगभग दो-तिहाई हिस्सा पुराने कर्जों पर ब्याज चुकाने में खर्च हो जाता है। इसके अलावा, देश का विदेशी मुद्रा भंडार इतना घट चुका है कि पाकिस्तान बाहरी वित्तीय सहायता के बिना कुछ महीनों का आयात भी नहीं कर सकता।
सिस्टम की विफलता
हमारा सिस्टम पूरी तरह फेल
एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए, नकवी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश की वर्तमान व्यवस्था पहले ही ध्वस्त हो चुकी है। यदि हालात ऐसे ही बने रहे, तो अगले एक दशक में भी पाकिस्तान इन्हीं समस्याओं में उलझा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी लोग लोकतंत्र की चाह रखते हैं, लेकिन लोकतंत्र के भीतर भी विभिन्न प्रकार की व्यवस्थाएं होती हैं। पाकिस्तान जिस मॉडल पर पिछले 70 वर्षों से चल रहा है, वह देश को आगे नहीं बढ़ा सका।
