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पाकिस्तान के गृह मंत्री की ईरान यात्रा: क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी रविवार को तेहरान की यात्रा पर जा रहे हैं, जहां वे ईरान के नेताओं के साथ द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा करेंगे। यह यात्रा अमेरिका-ईरान संघर्ष और सऊदी अरब-हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव के बीच हो रही है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य पहले से बनी सहमतियों को आगे बढ़ाना है। जानें इस यात्रा के पीछे की वजहें और क्षेत्रीय राजनीति पर इसके संभावित प्रभाव।
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पाकिस्तान के गृह मंत्री की तेहरान यात्रा

पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी रविवार को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के नेताओं और अधिकारियों से बातचीत के लिए तेहरान पहुंचेंगे। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है। अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और सऊदी अरब तथा यमन के हूती विद्रोहियों के बीच जारी लड़ाई ने इस क्षेत्र में तनाव को बढ़ा दिया है।


ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि नकवी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और दोनों देशों के बीच पहले से बनी सहमतियों को आगे बढ़ाना है। ईरान के सरकारी प्रसारक ‘आईआरआईबी’ ने शनिवार को बघाई के हवाले से कहा, “यह यात्रा पूरी तरह से द्विपक्षीय बातचीत के दायरे में है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस यात्रा के दौरान किसी विशेष मध्यस्थता संदेश पर चर्चा नहीं की जाएगी। साथ ही, यह भी संभावना है कि पाकिस्तान का एक आर्थिक मंत्री भी गृह मंत्री के साथ यात्रा करें।


नकवी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब क्षेत्र में हालात बेहद नाजुक हैं। सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष में तेजी आई है। सऊदी अरब ने हूती ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जबकि हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया है।


बढ़ते तनाव के कारण सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों और लाल सागर तथा बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सामान्य परिस्थितियों में, इस मार्ग से लगभग 10 से 15 प्रतिशत वैश्विक समुद्री व्यापार होता है। पाकिस्तान, ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है।


दोनों पक्षों ने जून में एक अंतरिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें पाकिस्तान गारंटर के रूप में शामिल था। हालांकि, जुलाई में दोनों पक्षों के बीच सैन्य तनाव बढ़ने के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो गई। होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी इस मामले में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।


‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, बघाई ने कहा कि नकवी की यात्रा का उद्देश्य क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा करना हो सकता है, लेकिन अब तक मंत्री के किसी विशेष अमेरिकी संदेश या प्रस्ताव को लेकर आने पर कोई चर्चा नहीं हुई है। ‘द नेशन’ की खबर में बताया गया कि बघाई ने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य इस्लामाबाद और तेहरान के बीच पहले बनी सहमतियों, विशेषकर नेतृत्व स्तर पर लिए गए निर्णयों को आगे बढ़ाना है।