पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने यूएन में कश्मीर मुद्दे पर फिर उठाई आवाज
संयुक्त राष्ट्र महासभा में शहबाज शरीफ का संबोधन
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 25 सितंबर - पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान 2025 में भारत के साथ संघर्ष को रोकने में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ का उल्लेख किया। उन्होंने कश्मीर मुद्दे को फिर से उठाते हुए कहा कि भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में पिछले साल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिसमें पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया था। इस हमले में 26 नागरिकों की जान गई थी।
ट्रंप का दावा और भारत का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस सप्ताह महासभा में कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका था। हालांकि, नई दिल्ली ने हमेशा किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इनकार किया है। शरीफ ने ट्रंप को उनके ‘‘दृढ़ और दूरदर्शी नेतृत्व’’ के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके ‘‘समय पर हस्तक्षेप’’ से दक्षिण एशिया में लाखों लोगों की जान बची।
कश्मीर का न्यायसंगत समाधान आवश्यक
अपने 23 मिनट के भाषण में, शरीफ ने कश्मीर मुद्दे का न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान आवश्यक बताया ताकि दक्षिण एशिया भविष्य में 2025 जैसी स्थिति में न पहुंचे। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर पर पाकिस्तान के दावों को बार-बार खारिज किया है, यह कहते हुए कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। हर साल की तरह, भारत ने पाकिस्तान के नेता के संबोधन का जवाब देने के लिए अपने स्थायी मिशन में से एक युवा राजनयिक को भेजने का निर्णय लिया है।
सिंधु जल संधि और कूटनीतिक प्रयास
शरीफ ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) का भी उल्लेख किया, जिसके बारे में भारत का कहना है कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद का समर्थन समाप्त करना होगा। पहलगाम हमले के बाद, भारत ने इस संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया। शरीफ ने पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का भी जिक्र किया।
सेना प्रमुख का उल्लेख
शरीफ ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को धन्यवाद देते हुए कहा कि ‘‘कठिन परिस्थितियों’’ में कूटनीति के लिए रास्ता बनाने में उनके प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
