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पाकिस्तान के सेना प्रमुख का भारत के खिलाफ कड़ा बयान: सिंधु जल संधि पर उठे सवाल

पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ एक सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने जल अधिकारों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है। इस बैठक में आतंकवाद के मुद्दे पर भी चर्चा की गई, जिसमें टीटीपी और अन्य उग्रवादी समूहों के पाकिस्तान में हमलों का जिक्र किया गया। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे के बारे में और अधिक जानकारी।
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पाकिस्तान के सेना प्रमुख का कड़ा रुख


नई दिल्ली: पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने सिंधु जल संधि को लेकर भारत के खिलाफ एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को आयोजित 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपने हिस्से के जल की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान के जल अधिकारों पर कोई प्रभाव पड़ता है, तो इसे देश के अस्तित्व से जुड़ा मुद्दा माना जाएगा।


पाकिस्तानी सेना का बयान

पाकिस्तानी सेना द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि जनता की अपेक्षाओं के अनुसार देश के हिस्से का जल सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएंगे। इसके साथ ही, सेना ने संकेत दिया कि यदि जल प्रवाह को रोकने या मोड़ने जैसी स्थिति उत्पन्न होती है, तो उसका जवाब राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए दिया जाएगा।


गौरतलब है कि भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया था। इसके बाद से पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाता रहा है और संभावित जल संकट को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है।


सिंधु जल संधि का महत्व

सिंधु जल संधि क्या है?


सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच नदियों के जल के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए गए थे। पाकिस्तान की कृषि और सिंचाई व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा इन नदियों पर निर्भर है, इसलिए इस संधि से जुड़े किसी भी बदलाव को गंभीरता से लिया जाता है।


बैठक में आतंकवाद का मुद्दा

आतंकवादी हमलों पर चर्चा


बैठक के दौरान, असीम मुनीर ने पाकिस्तान में बढ़ते आतंकवादी हमलों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य उग्रवादी समूह अफगानिस्तान की सीमा का उपयोग कर पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी दावा किया कि इन संगठनों को भारत का समर्थन प्राप्त है।


पाकिस्तानी सेना ने यह भी कहा कि अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसकी धरती का उपयोग किसी भी पाकिस्तान विरोधी संगठन द्वारा न किया जाए। सेना का कहना है कि यदि ऐसे समूहों की गतिविधियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है।