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पाकिस्तान को IMF से बड़ा झटका: 174 विधायी संशोधनों की जरूरत

पाकिस्तान को IMF से 7 अरब डॉलर की सहायता प्राप्त करने के लिए 174 विधायी संशोधन पेश करने होंगे। वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल ने इस बात की पुष्टि की है। IMF की चौथी समीक्षा बैठक में पाकिस्तान के आर्थिक सुधारों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है, जिसमें कर प्रणाली में सुधार और सरकारी खर्चों में कटौती जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा, बिजली कंपनियों के भविष्य और चीनी नीति में उदारीकरण पर भी चर्चा हो रही है। जानें इस महत्वपूर्ण आर्थिक स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
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पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर IMF की शर्तें


नई दिल्ली: आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने एक और गंभीर झटका दिया है। IMF ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 7 अरब डॉलर की सहायता के लिए पाकिस्तान को अपनी संसद में 174 विधायी संशोधन प्रस्तुत करने होंगे। यह जानकारी पाकिस्तान के वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल ने नेशनल असेंबली की वित्त और राजस्व संबंधी स्थायी समिति को दी।


वित्त सचिव ने बताया कि IMF की शर्तों के अनुसार इन 174 संशोधनों को पारित करना अनिवार्य है, लेकिन अंतिम निर्णय संसद द्वारा ही लिया जाएगा। दरअसल, IMF की चौथी समीक्षा बैठक के दौरान पाकिस्तान के आर्थिक सुधारों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है, जिसमें कर प्रणाली में सुधार और सरकारी खर्चों में कटौती जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है।


बिजली कंपनियों और चीनी नीति पर चर्चा

इस बैठक में पाकिस्तान की घाटे में चल रही बिजली कंपनियों के भविष्य पर भी गहन चर्चा हो रही है। इसके साथ ही, पाकिस्तान सरकार ने चीनी नीति में उदारीकरण के लिए एक मसौदा IMF को भेजा है, जिस पर देश के तीन प्रांत सहमत हो चुके हैं, जबकि एक प्रांत ने आपत्ति जताई है।


सरकारी कंपनियों की सब्सिडी पर उठे सवाल

IMF ने पाकिस्तान स्टेट ऑयल जैसी पांच प्रमुख सरकारी कंपनियों के लिए निर्धारित सॉवरेन वेल्थ फंड को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। IMF का कहना है कि यदि लाभ में चल रही कंपनियों का प्राइवेटाइजेशन किया जाता है, तो पहले से घाटे में चल रही वितरण कंपनियों का भविष्य क्या होगा, इस पर स्पष्टता आवश्यक है। पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' के अनुसार, सरकार की इस उदारीकरण नीति को लेकर देश में मतभेद बने हुए हैं।


सॉवरेन वेल्थ फंड और रेमिटेंस पर चर्चा

पाकिस्तान के सॉवरेन वेल्थ फंड कानून में बदलाव भी इस बातचीत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस फंड में OGDCL और पाकिस्तान स्टेट ऑयल जैसी पांच बड़ी सरकारी कंपनियां शामिल हैं, और IMF चाहता है कि इन कंपनियों पर भी वही गवर्नेंस और वित्तीय रिपोर्टिंग के नियम लागू हों, जो अन्य सरकारी कंपनियों पर लागू होते हैं। इसके अलावा, रेमिटेंस का मुद्दा भी चर्चा में है। IMF ने रेमिटेंस को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही सब्सिडी का विरोध किया है, जो पहले 120 अरब रुपये से अधिक थी, हालांकि बाद में इसे हटा लिया गया।