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पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की के बीच बढ़ते संबंधों का विश्लेषण

पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की के बीच संबंधों में तेजी से बदलाव आ रहा है। हाल ही में, पाकिस्तान के सेना प्रमुख की तुर्की यात्रा और बांग्लादेश के सेना प्रमुख की तुर्की यात्रा ने इस गठबंधन को और मजबूत किया है। जानें कि तुर्की बांग्लादेश में क्यों रुचि दिखा रहा है और पाकिस्तान का इसमें क्या रोल है। यह लेख इस जटिल संबंधों के पीछे की रणनीतियों और उद्देश्यों का विश्लेषण करता है।
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पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की के संबंधों की गहराई

पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की के बीच संबंध लगातार मजबूत होते जा रहे हैं। हाल ही में, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने अंकारा की यात्रा की। उनके लौटने के तुरंत बाद, बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान तुर्की पहुंचे। भारत के साथ प्रतिस्पर्धा के चलते, तुर्की पाकिस्तान और बांग्लादेश में अपनी रुचि बढ़ा रहा है। पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तुर्की ने पाकिस्तान का खुलकर समर्थन किया। हाल ही में, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने ढाका का दौरा किया।


जनरल वाकर-उज-जमान की यात्रा का विवरण

जनरल वाकर-उज-जमान पांच दिन की यात्रा पर तुर्की गए हैं। वे 19 जुलाई को सुबह 6:55 बजे तुर्की एयरलाइंस के विमान से अपनी पत्नी और छह सदस्यीय आधिकारिक दल के साथ रवाना हुए। उनके लौटने की योजना 25 जुलाई को है। इस बीच, बांग्लादेश-पाकिस्तान और तुर्की के बढ़ते गठबंधन पर भारत की नजर है, क्योंकि इसका उद्देश्य ढाका को भारत के प्रभाव से दूर रखना है।


आधिकारिक दल की संरचना

  • जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी)
  • 7 इन्फैंट्री डिविजन
  • सेना प्रमुख के सैन्य सहायक
  • सेना प्रमुख के स्टाफ अधिकारी
  • सेना प्रमुख के एड-डी-कैंप (एडीसी)
  • 7 इन्फैंट्री डिविजन के जीओसी के एडीसी
  • सेना प्रमुख सचिवालय से एक अतिरिक्त अधिकारी


तुर्की की बांग्लादेश में रुचि

तुर्की सरकार का मानना है कि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के साथ उसके संबंध मजबूत हैं और भविष्य में ये और भी बेहतर होंगे। पहले, तुर्की बांग्लादेश के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करने से बचता रहा, लेकिन अब शेख हसीना के पद से हटने के बाद, तुर्की और पाकिस्तान को ढाका के साथ संबंध सामान्य करने का अवसर मिला है।


  • तुर्की का मानना है कि केवल एक सहयोगी पर निर्भर रहना उसकी रणनीतिक पहुंच को सीमित कर सकता है। इसलिए, बांग्लादेश के साथ संबंधों में सुधार हो रहा है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान की तुलना में अधिक मजबूत है, और तुर्की इसे एक बड़े बाजार के रूप में देख रहा है।


  • तुर्की बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर में अपने प्रभाव को बढ़ाना चाहता है। म्यांमार में रोहिंग्याओं तक पहुंच बनाने की कोशिश भी कर रहा है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के निकटता के कारण, तुर्की बांग्लादेश में अधिक रुचि दिखा रहा है।


  • दोनों देशों के बीच संबंधों की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मई में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने तुर्की का दौरा किया। इसके बाद, जून में तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ढाका पहुंचे। हाल की यात्रा में, दोनों देशों ने ड्रोन तकनीक, टैंक विकास, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और रक्षा औद्योगिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया।


बांग्लादेश का तुर्की के प्रति झुकाव

शेख हसीना के शासन में, बांग्लादेश ने सेना पर अधिक निवेश नहीं किया और भारत के पक्ष में झुकाव रखा। लेकिन अब, हसीना के हटने के बाद, बांग्लादेश में भारत विरोधी लहर उभरी है। नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार ने भी भारत पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठाए हैं।


  • बांग्लादेश की सेना तुर्की को एक विश्वसनीय विकल्प मान रही है। तुर्की के हथियार सस्ते और भरोसेमंद हैं, जबकि पश्चिमी देशों का रक्षा बाजार महंगा है। यही कारण है कि बांग्लादेश की सेना तुर्की पर अधिक भरोसा कर रही है।


  • बांग्लादेश की सेना ने हाल ही में तुर्की से ड्रोन, छोटे हथियार, गोला-बारूद और तोपें खरीदी हैं। तुर्की ने बांग्लादेश में उत्पादन इकाई स्थापित करने और मिलकर हथियार बनाने का प्रस्ताव दिया है।


  • बांग्लादेश की सेना अब जमीनी हमलों के साथ-साथ हवाई क्षेत्र में भी ध्यान केंद्रित कर रही है। तुर्की न केवल रक्षा उपकरण बेच रहा है, बल्कि प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है।


पाकिस्तान के हित बांग्लादेश में

बांग्लादेश में पाकिस्तान की छवि अच्छी नहीं है, खासकर 1971 के युद्ध के कारण। इसलिए, पाकिस्तान के लिए बांग्लादेश के साथ संबंध सामान्य करना आसान नहीं है। इस्लामाबाद ने तुर्की के माध्यम से ढाका में अपनी उपस्थिति बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है।


  • हाल ही में, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच जेएफ-17 की खरीद पर बातचीत हुई। विश्लेषकों का मानना है कि इस सौदे के दौरान तुर्की ने पाकिस्तान के पक्ष में माहौल बनाया।


  • तुर्की पाकिस्तान में लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले ड्रोन की असेंबली यूनिट लगाने पर विचार कर रहा है, जिससे बांग्लादेश और अन्य दक्षिण एशियाई देशों को ड्रोन की आपूर्ति की जा सकेगी।


  • बांग्लादेश में पाकिस्तान की बढ़ती रुचि भारत के प्रभाव को संतुलित करने की एक रणनीति है। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद, पाकिस्तान और बांग्लादेश के रिश्ते बेहतर हुए हैं।