पाकिस्तान में आत्मघाती धमाका: स्वात पीस रैली के दौरान 9 की मौत
पाकिस्तान में बड़ा आतंकी हमला
नई दिल्ली: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में रविवार को एक गंभीर आतंकी घटना हुई। स्वात जिले के काबल शहर में पुलिस स्टेशन के निकट हुए आत्मघाती विस्फोट में 9 लोगों की जान चली गई और 18 अन्य घायल हुए हैं। यह धमाका उस समय हुआ जब लोग 'स्वात पीस रैली' में शांति और आतंकवाद के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
धमाके का समय और स्थान
मलाकंद के RPO के अनुसार, हमलावर ने उस समय खुद को उड़ा लिया जब 'स्वात अमन जिरगा' के नेतृत्व में सैकड़ों लोग पुलिस स्टेशन के पास मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारी शांति की मांग करते हुए हाथों में प्लेकार्ड लिए हुए थे। जिला पुलिस प्रमुख उमर खान ने बताया कि मृतकों में कम से कम 5 पुलिस अधिकारी शामिल हैं, जबकि अन्य आम नागरिक थे जो रैली में भाग ले रहे थे।
धमाका इतना भयंकर था कि आसपास की गाड़ियों को नुकसान पहुंचा और सड़क पर मलबा बिखर गया। घटना के तुरंत बाद बचाव दल और पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से फैल रहा है जिसमें पहले रैली में बड़ी संख्या में लोग दिखाई दे रहे हैं। कुछ ही सेकंड बाद एक जोरदार धमाका होता है और लोग जान बचाने के लिए भागते नजर आते हैं। धुएं का गुबार और चीख-पुकार सुनाई देती है।
अगले क्लिप में क्षतिग्रस्त वाहन, सड़क पर बिखरे सामान और एम्बुलेंस घायलों को ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोग भी घायलों की मदद करते हुए नजर आ रहे हैं। पुलिस ने इलाके को सील कर दिया है और जांच शुरू कर दी है।
सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित जिम्मेदार
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। हालांकि, अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का शक तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर है। TTP और अफगान तालिबान के बीच करीबी संबंध माने जाते हैं। पाकिस्तानी अधिकारी पहले भी TTP को अफगानिस्तान में पनाह देने का आरोप लगा चुके हैं, जिसे काबुल ने हमेशा खारिज किया है।
स्वात में बढ़ता खतरा
स्वात घाटी कभी उग्रवादियों का गढ़ हुआ करती थी, लेकिन 2007 में सेना के ऑपरेशन के बाद यहां शांति स्थापित हुई थी। हाल के महीनों में खैबर पख्तूनख्वा में हमलों में वृद्धि देखी गई है, जिसमें पुलिस, सुरक्षाबल और आम नागरिक लगातार निशाने पर हैं।
अफगान सीमा से लगे इस क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उग्रवादी शांति रैली को निशाना बनाकर इलाके में दहशत फैलाना चाहते थे।
