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पाकिस्तान में इमरान अली की न्यायेतर हत्या पर UN विशेषज्ञों की चिंता

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बलूचिस्तान के निवासी इमरान अली के जबरन गायब होने और न्यायेतर हत्या के मामले में पाकिस्तान से त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की है। अली को पिछले साल अगवा किया गया था और उसके परिवार को एक साल तक उसकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। विशेषज्ञों ने इस मामले में गंभीर चिंता व्यक्त की है और जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके पीछे की सच्चाई।
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संयुक्त राष्ट्र की चिंता

(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 8 सितंबर - मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बलूचिस्तान के निवासी इमरान अली के मामले में गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि इस मामले की त्वरित और निष्पक्ष जांच की जाए, जिसमें अली के “जबरन गायब होने” और उसकी “न्यायेतर हत्या” की घटनाएं शामिल हैं। पिछले सप्ताह, विशेषज्ञों ने बलूचिस्तान में अली की हत्या के संदर्भ में पाकिस्तान से अनुरोध किया था कि उसकी हिरासत और मौत से संबंधित परिस्थितियों की जांच की जाए। अली को पिछले साल 27 अगस्त को आतंकवाद रोधी विभाग के लगभग 20 अधिकारियों द्वारा उसके अपार्टमेंट से अगवा किया गया था और उसे एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया था।


परिवार को जानकारी का अभाव

अली के परिवार को एक साल तक उसकी स्थिति के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। हालांकि, कुछ लोगों ने जो अली के साथ हिरासत में थे, रिहा होने के बाद पुष्टि की कि उसे हिरासत में रखा गया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि हिरासत के दौरान अली को कई दिनों तक यातनाएं दी गईं।


जबरन गायब होने की परिभाषा

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद अधिकारी यह मानने से इनकार करते हैं कि वह उनकी हिरासत में है, या उसके बारे में जानकारी छिपाते हैं, तो इसे जबरन गायब होना माना जाता है। ऐसी स्थिति में पीड़ित कानून के संरक्षण से बाहर हो जाता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।


अली की मौत की परिस्थितियाँ

पाकिस्तान के जांच आयोग के समक्ष पिछले महीने हुई सुनवाई में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि अली की मई 2026 में एक कथित मुठभेड़ में मौत हो गई थी। अधिकारियों को उसके शव की पहचान करने में लगभग एक महीने का समय लगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि वे अली के शव को सुरक्षित नहीं रख सके और इसलिए जून 2026 में उसे दफना दिया गया।


परिवार की पहचान

अली का परिवार क्वेटा के सिविल अस्पताल पहुंचा, जहां परिजनों ने अस्पताल के रिकॉर्ड में मौजूद तस्वीरों के आधार पर शव की पहचान की। अली का शव कथित तौर पर छह अन्य शवों के साथ अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के कर्मचारियों या पुलिस ने इन शवों के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं तैयार किया और न ही उनकी सूचना दर्ज की।


अन्य शवों की संभावित पहचान

विशेषज्ञों ने कहा कि बलूचिस्तान में ऐसे मामलों को देखते हुए यह गंभीर चिंता का विषय है कि अन्य शव भी जबरन गायब किए गए लोगों के हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इमरान अली के मामले की त्वरित, गहन, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिसमें उसकी मौत के कारण, तरीके और परिस्थितियों का पता लगाया जाना चाहिए।