पाकिस्तान में ईंधन संकट: पेट्रोल की कमी और इम्पोर्ट में देरी
पाकिस्तान में फ्यूल सप्लाई संकट
पाकिस्तान एक नए ईंधन संकट का सामना कर रहा है, जिसमें पेट्रोल की घटती उपलब्धता, आयात में देरी और नीतिगत अड़चनों ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, उद्योग के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि पेट्रोल का स्टॉक घटकर लगभग 379,000 टन रह गया है, जिसमें स्थानीय रिफाइनरियों से मिलने वाली सप्लाई भी शामिल है। मौजूदा खपत दर को देखते हुए, यह स्टॉक केवल दो हफ्तों के लिए ही पर्याप्त है। जुलाई के पहले पखवाड़े में पेट्रोल की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है; रोजाना की बिक्री पिछले साल के आंकड़ों से अधिक रही है, जिससे ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका है। खपत में वृद्धि ने पहले से सीमित स्टॉक पर दबाव बढ़ा दिया है, जबकि समय पर ईंधन आयात न होने से अनिश्चितता और बढ़ गई है। हालांकि, आने वाले दिनों में लगभग 153,000 टन पेट्रोल की खेप आने की उम्मीद है, लेकिन पिछले महीने एक निश्चित कार्गो को मंजूरी नहीं मिल पाई और कई तेल मार्केटिंग कंपनियों की एक और आयात डील कथित तौर पर रद्द कर दी गई, जिससे सप्लाई और भी तंग हो गई। होर्मुज़ जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब के आसपास तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में रुकावटों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें और माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है। हालांकि, उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि घरेलू प्रशासनिक और वित्तीय चुनौतियां इस संकट को और गंभीर बना रही हैं।
सरकार से बकाया भुगतान की मांग
तेल मार्केटिंग कंपनियों ने सरकार से लगभग 66.7 अरब रुपये के बकाया 'प्राइस डिफरेंशियल क्लेम' (PDC) का तात्कालिक भुगतान करने की अपील की है। उनका कहना है कि भुगतान में देरी के कारण नए ईंधन आयात के लिए फंड जुटाने की उनकी क्षमता प्रभावित हुई है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग के अनुमानों से पता चलता है कि इस बकाया राशि से लगभग 250,000 टन पेट्रोल खरीदा जा सकता है, जो आयातित कार्गो की कई खेपों के बराबर है और इससे देश के भंडार को काफी मजबूती मिलेगी।
कस्टम क्लीयरेंस में देरी
अधिकारियों ने WeBOC सिस्टम के माध्यम से कस्टम क्लीयरेंस में हो रही देरी की ओर भी इशारा किया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि बंदरगाहों पर आयातित ईंधन की धीमी प्रोसेसिंग से देश के अंदरूनी बाजारों में सप्लाई बाधित हो सकती है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि रिफाइनरी में लगातार उत्पादन के कारण डीजल का स्टॉक काफी हद तक स्थिर बना हुआ है, लेकिन उद्योग के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि अगर अनिश्चितता बनी रहती है, तो घबराहट में खरीदारी या जमाखोरी से जल्द ही कमी पैदा हो सकती है।
