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पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी पर फतवा: इस्लामिक स्कॉलर ने किया विवादित ऐलान

पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जब एक प्रमुख इस्लामिक विद्वान ने फतवा जारी कर सभी डिजिटल संपत्तियों को इस्लाम में अवैध घोषित किया। इस फतवे का असर न केवल पाकिस्तान में, बल्कि वैश्विक मुस्लिम समुदाय पर भी पड़ सकता है। सरकार क्रिप्टो को रेगुलेट करने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है, जबकि विशेषज्ञ इस फतवे को गलतफहमी मानते हैं। जानें इस मुद्दे के पीछे की पूरी कहानी और ट्रंप परिवार के पाकिस्तान से संबंध।
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पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी पर धार्मिक विवाद


नई दिल्ली: पाकिस्तान में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर एक बड़ा धार्मिक विवाद उत्पन्न हो गया है। एक प्रमुख इस्लामिक विद्वान ने फतवा जारी कर बिटकॉइन, इथेरियम और USDT सहित सभी डिजिटल संपत्तियों की ट्रेडिंग को इस्लाम में अवैध घोषित किया है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सरकार खुद क्रिप्टो को रेगुलेट करने और इसे बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।


दारुल उलूम कराची का फतवा

मुफ्ती मुहम्मद तकी उस्मानी, जो इस्लामिक वित्त के प्रमुख स्कॉलर्स में से एक माने जाते हैं, ने यह फतवा जारी किया। इसे पाकिस्तान के प्रतिष्ठित सुन्नी मदरसे दारुल उलूम कराची द्वारा प्रकाशित किया गया। फतवे में कहा गया है कि क्रिप्टो, टोकन और स्टेबलकॉइन इस्लामिक कानून के तहत 'धन या संपत्ति' की परिभाषा में नहीं आते।


इसलिए, शरिया के अनुसार इनकी खरीद-बिक्री अनुचित है। मदरसे ने यह भी स्पष्ट किया कि नाम बदलने से क्रिप्टो की शरिया में वैधता नहीं बदलती। हालांकि, यह फतवा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसका प्रभाव पाकिस्तान और वैश्विक मुस्लिम समुदाय पर महत्वपूर्ण माना जाता है।


सरकार का क्रिप्टो रेगुलेशन

इस्लामाबाद क्रिप्टो क्षेत्र को लेकर सक्रिय है। सरकार ने पहले पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल का गठन किया और फिर वर्चुअल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स को लाइसेंस देने के लिए पाकिस्तान वर्चुअल एसेट्स रेगुलेटरी अथॉरिटी (PVARA) की स्थापना की। अनुमान है कि 2 करोड़ से अधिक पाकिस्तानी क्रिप्टो से जुड़े हुए हैं और पिछले वर्षों में अरबों डॉलर के लेन-देन हुए हैं।


PVARA के चेयरमैन बिलाल बिन साकिब ने मदरसे से अपील की है कि सट्टा वाले क्रिप्टो और ठोस संपत्ति से समर्थित डिजिटल एसेट में अंतर किया जाए। उन्होंने कहा, "मुख्य सवाल यह है कि क्या डिजिटल एसेट शरिया में धन है। सोने से समर्थित टोकन या डिजिटल इस्लामिक बॉंड की प्रकृति पूरी तरह भिन्न है।"


विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

अर्थशास्त्री यूसुफ नज़र ने कहा कि यह फतवा गलतफहमी पर आधारित है। क्रिप्टो को डॉलर या सोने की तरह बदला जा सकता है। पूरे क्षेत्र को खारिज करना समझ की कमी को दर्शाता है। उनके अनुसार, क्रिप्टो से पाकिस्तान में आने वाले रेमिटेंस सस्ते और तेज हो सकते हैं।


वित्तीय विशेषज्ञ राशिद मसूद आलम ने कहा कि सरकार के रेगुलेशन के बाद चर्चा अब "क्या इस्तेमाल करें" से "कैसे प्रबंधित करें" पर केंद्रित हो गई है। करेंसी एक्सचेंज एसोसिएशन के जफर पराचा ने चेतावनी दी कि धार्मिक समुदाय में इस फतवे का व्यापार पर प्रभाव पड़ सकता है।


ट्रंप परिवार का पाकिस्तान से संबंध

यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 26 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान ने वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल (WLF) के साथ एक समझौता किया। WLF एक विकेंद्रीकृत वित्त कंपनी है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक और डोनाल्ड जूनियर का समर्थन प्राप्त है। इस डील पर सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और WLF के ज़ैचरी विटकॉफ मौजूद थे। यह समझौता भारत-पाक तनाव के कुछ दिन पहले हुआ था। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रंप परिवार के व्यापारिक हित भू-राजनीति पर प्रभाव डालते हैं या नहीं।