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पाकिस्तान में विद्रोह और ईरान के हमलों से बढ़ता तनाव

पाकिस्तान में विद्रोह की स्थिति गंभीर होती जा रही है, जहां ईरान के हमलों ने सऊदी अरब में तनाव को बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख मुनीर की स्थिति अब चुनौतीपूर्ण हो गई है। सऊदी अरब के साथ सुरक्षा समझौते के बावजूद, पाकिस्तान ने मदद नहीं की, जिससे हूती विद्रोहियों ने हमले किए। इस स्थिति में, दुनिया की नजरें सऊदी अरब के नेताओं के संभावित जवाब पर टिकी हुई हैं।
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पाकिस्तान में विद्रोह की स्थिति

पाकिस्तान में विद्रोह की लहर तेजी से फैल रही है, जहां हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इस बीच, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख मुनीर इस संकट को नजरअंदाज करते हुए अपने राजनीतिक खेल में व्यस्त हैं। कभी वे ईरान के पक्ष में खड़े होते हैं, तो कभी अमेरिका के। लेकिन अब उनकी स्थिति गंभीर हो गई है, जिससे उनकी शक्ति कम होती नजर आ रही है।


ईरान द्वारा उन मुस्लिम देशों पर हमले किए जा रहे हैं, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जिसमें सऊदी अरब भी शामिल है। हाल ही में, सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ एक सुरक्षा समझौता किया था, जिसके तहत यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।


सऊदी अरब में हमलों की स्थिति

जैसे ही ईरान ने हमले शुरू किए, पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद नहीं की। अचानक, जब शहबाज और मुनीर सऊदी पहुंचे, तो ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भीषण हमले किए। इन हमलों में सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों को बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया। इस हमले में कम से कम 30 सैनिकों की मौत और 50 से अधिक घायल होने की खबर है।


हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सऊदी समर्थित बलों को निशाना बनाया है। यह हमला तब हुआ जब पाकिस्तानी पीएम और सेना प्रमुख सऊदी अरब में मौजूद थे, जिससे इस्लामाबाद को एक कड़ा संदेश मिला है कि उनकी सैन्य गारंटी के बावजूद, हूती विद्रोही पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।


भविष्य की संभावनाएं

2022 के युद्ध विराम के बाद, यह पहली बार है जब सऊदी अरब की सीमा पर तनाव इतना बढ़ गया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के नेता हूती विद्रोहियों और ईरान समर्थित मिलिशिया के इस सीधे चुनौती का क्या जवाब देंगे।