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पाकिस्तान में सुरक्षा संकट: ड्रोन हमलों से बचने के लिए सेना ने अपनाया अनोखा तरीका

पाकिस्तान में सुरक्षा की स्थिति गंभीर होती जा रही है, खासकर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बढ़ते ड्रोन हमलों के कारण। सुरक्षा बल अब अपनी चौकियों को मछली पकड़ने वाले जालों से ढक रहे हैं, ताकि ड्रोन हमलों से बचा जा सके। हाल ही में खैबर पख्तूनख्वा में एक पुलिस चेकपोस्ट पर हुए हमले ने स्थिति को और भी चिंताजनक बना दिया है। जानें कैसे पाकिस्तानी सेना ने इस खतरे का सामना करने के लिए विशेष उपाय किए हैं।
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पाकिस्तान में बिगड़ते सुरक्षा हालात


नई दिल्ली: पाकिस्तान में सुरक्षा की स्थिति लगातार deteriorate हो रही है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बढ़ते ड्रोन हमलों के कारण, पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने अपनी चौकियों की सुरक्षा के लिए एक अनोखा उपाय अपनाया है। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बल अब अपनी चौकियों को मछली पकड़ने वाले जालों से ढक रहे हैं ताकि ड्रोन हमलों से बचा जा सके।


खैबर पख्तूनख्वा में हुआ बड़ा ड्रोन हमला

हाल ही में, उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक पुलिस चेकपोस्ट पर विस्फोटकों से भरे ड्रोन द्वारा हमला किया गया था। यह हमला अफगानिस्तान सीमा से लगभग 30 किलोमीटर दूर हंगू जिले की सरकी पियाला पुलिस चौकी पर हुआ, जहां TTP के लड़ाकों ने चौकी को चारों ओर से घेर लिया और फायरिंग की। इस हमले की जिम्मेदारी TTP ने ली है।


हंगू क्षेत्र को TTP का गढ़ माना जाता है, और यहां पहले भी पाकिस्तानी सेना के ठिकानों पर कई हमले हो चुके हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, स्थिति इतनी गंभीर है कि जवान बिना सुरक्षा कवर के बैरक से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। कई क्षेत्रों में पुलिस और प्रशासन की उपस्थिति बहुत कम हो गई है।


जाल से बचाव की उम्मीद

इस खतरे का सामना करने के लिए, पाकिस्तानी सेना ने दो महीने पहले से अपनी चौकियों पर मछली पकड़ने वाले जाल लगाने की प्रक्रिया शुरू की है। ये जाल साधारण होते हैं, जिन्हें आमतौर पर मछुआरे उपयोग करते हैं। यह एक सस्ता और प्रभावी उपाय है। सैनिकों को उम्मीद है कि जब ड्रोन हमला होगा, तो वह सीधे चौकी पर गिरने के बजाय जाल में उलझ जाएगा और दूर ही फट जाएगा, जिससे जवानों की जान बच जाएगी।


आसमान पर नजर रख रहे शार्प शूटर

सिर्फ जाल ही नहीं, पाकिस्तानी सेना ने ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने के लिए विशेष इंतजाम भी किए हैं। चौकियों पर बुलेटप्रूफ जैकेट पहने तेज निशानेबाजों को 24 घंटे की ड्यूटी पर तैनात किया गया है। इनका कार्य लगातार आसमान की निगरानी करना और दुश्मन के ड्रोन को देखते ही उसे गोली मारकर गिराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन-रूस युद्ध की तरह, अब TTP भी सस्ते ड्रोन को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जिसने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है।