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पाकिस्तान में सुरक्षा स्थिति: इस्लामाबाद और अन्य शहरों में हाई अलर्ट

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य बड़े शहरों में सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट घोषित किया गया है। प्रमुख सड़कों को बंद किया जा रहा है, और पुलिस की भारी तैनाती की गई है। सरकार ने कई स्थानों पर सुरक्षाबलों को बुलाया है और अस्पतालों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। इस्लामाबाद में धारा 144 लागू की गई है, और इंटरनेट सेवा पर भी प्रतिबंध लगाने की योजना है। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और पाकिस्तान में चल रहे लॉन्ग मार्च के बारे में।
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पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था का कड़ा इंतजाम

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा को लेकर हाई अलर्ट घोषित किया गया है। कई महत्वपूर्ण सड़कों को बंद किया जा रहा है, और इस्लामाबाद, रावलपिंडी तथा अटक की सड़कों को कंटेनरों से अवरुद्ध कर दिया गया है। फिलहाल, केवल इस्लामाबाद-लाहौर मार्ग खुला है। हर चौराहे पर पुलिस की भारी तैनाती की गई है, और विभिन्न क्षेत्रों से सुरक्षाबलों को बुलाया जा रहा है। प्रमुख शहर अब किले में तब्दील हो चुके हैं, और स्कूल-कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लिया गया है। अस्पतालों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है.


सड़कें और पुल बंद

पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद को पेशावर से जोड़ने वाली सड़क को बंद कर दिया है, और कई स्थानों पर सड़क को खोदा गया है। बलूचिस्तान और सिंध से बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को इस्लामाबाद, रावलपिंडी और अटक में तैनात किया गया है। इस्लामाबाद की मुख्य सड़कों को कंटेनरों से सील किया गया है, जिनमें रेत और बजरी भरी गई है ताकि भीड़ इन्हें हटा न सके। इसके अलावा, सभी कंटेनरों को आपस में वेल्ड किया जा रहा है और कीले तथा कटीले तार भी लगाए जा रहे हैं.


सुरक्षा बलों की तैनाती

इस्लामाबाद में 22,000 जवानों और अटक में 30,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। रावलपिंडी में 9,000 सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाल रखा है, और वहां पुलिस की छुट्टियों को 1 अक्टूबर तक रद्द कर दिया गया है। शहर के 30 प्रवेश द्वारों को कंटेनरों से बंद किया गया है.


अस्पतालों और होटलों की तैयारी

पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद में 13 होटलों को बुक किया है ताकि पुलिस अधिकारियों के ठहरने की व्यवस्था की जा सके। सभी अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, और कम से कम 100 बैग खून रखने का निर्देश दिया गया है। रावलपिंडी के संवेदनशील क्षेत्रों में सेना को छह महीने के लिए तैनात किया गया है.


धारा 144 का लागू होना

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने 20 सितंबर से 5 अक्टूबर तक इस्लामाबाद समेत पंजाब के 5 जिलों में रेंजर्स की तैनाती की है। पंजाब प्रांत में 13 दिनों तक सभा और जनसभा पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस्लामाबाद में दो महीने तक धारा 144 लागू रहेगी.


इंटरनेट सेवा पर संभावित प्रतिबंध

बलूचिस्तान प्रांत में अगले 30 दिनों तक निषेधज्ञा लागू रहेगी, जिसमें भीड़, जलसा और जनसभा पर पूरी तरह से पाबंदी है। इस बीच, पंजाब सरकार ने संघीय सरकार को पत्र लिखा है जिसमें 27 सितंबर को अटक और रावलपिंडी के कुछ हिस्सों में मोबाइल सेवा बंद करने या कम करने की अनुमति मांगी गई है.


पाकिस्तान की तैयारियों का कारण

पाकिस्तान सरकार की इस तैयारी का मुख्य कारण तीन बड़े लॉन्ग मार्च हैं। धार्मिक संगठन जमात-ए-इस्लामी ने सरकार के खिलाफ लॉन्ग मार्च निकाला था, लेकिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से बातचीत के बाद इसे स्थगित कर दिया गया। किसान यूनियन ने भी लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने 27 मार्च को इस्लामाबाद तक पदयात्रा की योजना बनाई है.


पाकिस्तान को किससे डर?

हालांकि, पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि उसे इमरान खान के समर्थकों से डर है। शहबाज शरीफ ने जमात से बात की, लेकिन पीटीआई के नेताओं से संपर्क नहीं किया। इमरान खान की तीन बहनों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी उम्र 65 वर्ष से अधिक है.


पुलिस द्वारा गिरफ्तारियां

पाकिस्तान की सेना और पुलिस ने पीटीआई के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है। लगातार पीटीआई कार्यकर्ताओं के घरों पर छापेमारी की जा रही है, और अब तक छह विधायक और पांच सांसदों को हिरासत में लिया गया है. पीटीआई का दावा है कि 1500 से अधिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है.


पीटीआई का इतिहास

इमरान खान 2023 से जेल में हैं, और हाल ही में उन्हें अदालत के आदेश पर अस्पताल लाया गया था। पीटीआई समर्थक उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तान की शासन व्यवस्था पर सेना प्रमुख असीम मुनीर की पकड़ मजबूत होती जा रही है.