प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा: ऐतिहासिक संबंधों की पुनरावृत्ति
प्रधानमंत्री मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान का दौरा किया है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संबंध इतने मजबूत हैं कि मोदी ने अपने तीन कार्यकाल में चार बार इस देश का दौरा किया है। यह राष्ट्र भारत के मित्र देशों में से एक है, लेकिन इसके साथ एक कड़वा अतीत भी जुड़ा हुआ है, जिसे कुछ लोग भुलाना चाहते हैं, जबकि अन्य इसे स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहते हैं। मुगलों का भारत में आगमन इसी क्षेत्र से शुरू हुआ था, और यहीं के एक निर्वासित ने भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी थी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) जिस बाबर के नाम पर नाराज होती है, वह इसी देश से संबंधित था।
बाबर का इतिहास और भारत में आगमन
बाबर, जो फरगाना घाटी से आया था, पहले अफगानिस्तान पहुंचा और फिर भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की। 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में उसने दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इब्राहीम लोदी को हराया, जिससे मुगल साम्राज्य की नींव रखी गई। अगले 331 वर्षों तक भारत में मुगलों का शासन रहा। असदुद्दीन ओवैसी ने मोदी के सम्मान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बाबर को गालियाँ देने वाले प्रधानमंत्री उसी के देश से पुरस्कार लेकर आए हैं।
बाबर का प्रारंभिक जीवन
बाबर का जन्म फरगाना घाटी के अंदीजान में हुआ था, जो अब उज्बेकिस्तान में है। उसके पिता उमर शेख मिर्जा फरगाना के शासक थे। बाबर के चाचा और चचेरे भाइयों ने उसकी सत्ता को चुनौती दी, जिससे उसे कई संघर्षों का सामना करना पड़ा। उज्बेक कबीलों के नेता मुहम्मद शैबानी खान ने समरकंद और फरगाना पर कब्जा कर लिया। बाबर ने समरकंद पर दो बार कब्जा किया, लेकिन उसे हार का सामना करना पड़ा।
काबुल पर बाबर की विजय
फरगाना से भागने के बाद, बाबर ने 1504 में काबुल पर कब्जा कर लिया। उस समय काबुल में कमजोर शासन था, जिसे बाबर ने आसानी से जीत लिया। बाबर ने काबुल को घेर लिया और अंततः 1504 में काबुल और गजनी पर नियंत्रण प्राप्त किया। काबुल भारत में प्रवेश का एक महत्वपूर्ण मार्ग था।
उज्बेकिस्तान का वर्तमान
जब बाबर ने फरगाना छोड़ा था, तब वहां छोटे-छोटे कबीले आपस में लड़ते रहते थे। आज, समरकंद उज्बेकिस्तान के सबसे तेजी से विकसित शहरों में से एक बन चुका है। यह शहर सिल्क रोड के ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ आधुनिक पर्यटन का केंद्र भी बन गया है।
उज्बेकिस्तान की अर्थव्यवस्था
वर्ल्ड बैंक के अनुसार, उज्बेकिस्तान की अर्थव्यवस्था लगभग 181.5 अरब अमेरिकी डॉलर है। देश का जीडीपी 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। यहां की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र, कृषि और उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान है।
उज्बेकिस्तान का धार्मिक-सांस्कृतिक तानाबाना
उज्बेकिस्तान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है, जहां 90 प्रतिशत आबादी इस्लाम का पालन करती है। सोवियत संघ के दौरान यहां धार्मिक गतिविधियों पर कई प्रतिबंध थे, लेकिन स्वतंत्रता के बाद सरकार ने इस्लाम के प्रति उदारता दिखाई है।
