फ्रांस में छात्र आंदोलन: वैश्विक भू-राजनीति का नया केंद्र
फ्रांस में छात्र आंदोलन का वैश्विक प्रभाव
फ्रांस में शिक्षा प्रणाली की खराब स्थिति और बजट में कटौती के खिलाफ शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। ईरान ने इस संदर्भ में फ्रांस को मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति उसके दोहरे मापदंडों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने तेहरान में फ्रांस के राजदूत पियारे कोचाड़ को तलब किया और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की बर्बरता के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बाकेई ने फ्रांस के दोहरे रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि समस्या विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि पश्चिमी देशों की पाखंडी नीतियां हैं। उन्होंने जनवरी 2026 में ईरान में हुए प्रदर्शनों का उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि तब फ्रांसीसी अधिकारियों ने ईरान में पुलिस थानों पर हुए हमलों को शांतिपूर्ण विद्रोह बताया था।
बाकेई ने सवाल उठाया कि जब वही घटनाएं फ्रांस में होती हैं, तो सरकार इसे शहरी हिंसा कहकर बल प्रयोग को कैसे सही ठहरा सकती है? क्या प्रदर्शनकारियों की भौगोलिक स्थिति के आधार पर मानवाधिकारों की परिभाषा बदल जाती है?
हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह पुलिस पर हमले या आगजनी का समर्थन नहीं करता, लेकिन फ्रांस का विरोधाभास निंदनीय है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस छात्र आंदोलन को एक नया मोड़ देते हुए कहा है कि फ्रांस में हो रही घटनाएं अनियंत्रित प्रवासन का परिणाम हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लिखा कि यह स्कूलों के बारे में नहीं है, बल्कि इस्लाम के उस देश पर कब्जा करने की कोशिश के बारे में है जो कभी महान हुआ करता था।
उत्तरी पेरिस के एक स्कूल से शुरू हुआ यह छात्र आंदोलन अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और यह पूरी तरह से एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है। फ्रांस के विभिन्न शहरों में ढाई लाख से अधिक प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर चुके हैं, जिसमें छात्रों के साथ-साथ शिक्षक संघ, अभिभावक और विभिन्न श्रमिक संगठन भी शामिल हैं। सुरक्षा व्यवस्था के कारण देश के 900 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। पेरिस, मार्सिले, नटिस और लन जैसे प्रमुख शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं।
पुलिस द्वारा आंसू गैस, वाटर कैनन और स्टन ग्रेनेड के इस्तेमाल में अब तक 300 से अधिक छात्र और 700 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो चुके हैं। इस दौरान एक 15 वर्षीय छात्र का हाथ भी उड़ गया है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर फ्रांसीसी प्रशासन ने अब तक 6000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से लगभग 85% नाबालिग हाई स्कूल के छात्र हैं। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, ट्रंप का यह बयान अमेरिकी घरेलू राजनीति से प्रेरित है, जहां वे प्रवासियों के खिलाफ अपनी सख्त नीतियों को सही ठहराने के लिए फ्रांस की स्थिति का उदाहरण दे रहे हैं। इस पर फ्रांस के विदेश मंत्री झील नोएल बैरो ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, उन्होंने कहा कि फ्रांस के विरोधी और साझेदार सभी अपने-अपने एजेंडे के तहत इस आंदोलन की मनगढ़ंत व्याख्या कर रहे हैं।
