बांग्लादेश और मक्का पैक्ट: भारत के लिए नई चुनौतियाँ
बांग्लादेश के साथ भारत के रिश्तों की स्थिति
वर्तमान में बांग्लादेश और भारत के बीच संबंध उस स्तर पर नहीं हैं जो शेख हसीना के शासन के दौरान थे। अमेरिका के लिए भारत के साथ मित्रता एक आवश्यकता बन गई है। वैश्विक शक्तियों के लिए भारत के साथ संबंध स्थापित करना अब एक मजबूरी है। दूसरी ओर, पाकिस्तान आर्थिक संकट में है, जहां लोगों के पास खाने के लिए रोटी नहीं है। आटे की कीमतें बढ़ रही हैं और पानी की भी कमी है। मक्का पैक्ट के गठन के बाद, जिसमें पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब शामिल हैं, भारत की चिंताएँ बढ़ गई हैं। हाल ही में खबर आई है कि बांग्लादेश भी इस मक्का पैक्ट में शामिल हो सकता है।
मक्का पैक्ट की जानकारी
मक्का पैक्ट को इस्लामिक नाटो के रूप में भी जाना जाता है, जो नाटो देशों की तरह कार्य करता है। इस समझौते में शामिल देशों के बीच एकता होगी, जिसका अर्थ है कि यदि किसी देश पर हमला होता है, तो अन्य देश एकजुट होकर उसका समर्थन करेंगे। बांग्लादेश भी इस समझौते को स्वीकार करने के संकेत दे रहा है। हाल ही में जेद्दा में ओआईसी के विदेश मंत्रियों की बैठक में बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने सऊदी विदेश मंत्री से मुलाकात की और एक पत्र सौंपा। इससे यह सवाल उठता है कि बांग्लादेश जो सार्वजनिक रूप से मक्का पैक्ट में शामिल नहीं होने की बात कर रहा है, क्या वास्तव में कोई गुप्त समझौता चल रहा है।
बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्ते
यदि बांग्लादेश पाकिस्तान के करीब जाता है, तो क्या यह भारत के लिए चिंता का विषय नहीं होगा? बांग्लादेश, जिसे भारत ने स्वतंत्रता दिलाई थी, अब पाकिस्तान के करीब जा रहा है, जो भारत का प्रतिकूल देश है। पहले की बांग्लादेशी सरकारें पाकिस्तान के साथ संबंध बनाने में असफल रही थीं। पाकिस्तान में बांग्लादेश को लेकर एक मजाक प्रचलित था, लेकिन अब वही बांग्लादेश अपने इस्लामिक भाई के रूप में उभर रहा है।
