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बांग्लादेश के ऊर्जा संकट में पाकिस्तान का बड़ा झटका

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद, नई सरकार ने पाकिस्तान के साथ सहयोग स्थापित करने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान ने अचानक अपनी हवाई सीमा बंद कर दी। इससे बांग्लादेश का रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट संकट में पड़ गया है। बांग्लादेश के विज्ञान मंत्री ने इस स्थिति को स्वीकार किया है कि पाकिस्तान ने बिना किसी कारण के डिलीवरी में बाधा डाली। यह घटना बांग्लादेश के लिए एक गंभीर ऊर्जा संकट को और बढ़ा सकती है।
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बांग्लादेश में ऊर्जा संकट और पाकिस्तान की भूमिका

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से एक नई भू-राजनीतिक धुरी बनाने की कोशिशें जारी थीं। तारिक रहमान और नई बांग्लादेशी सरकार इस्लामाबाद के साथ एक नया सहयोग स्थापित करने के लिए उत्सुक थे। लेकिन कूटनीति में एक पुरानी कहावत है: जो अपनी फितरत नहीं बदलता, वह सच्चा मित्र नहीं बन सकता। पाकिस्तान ने अचानक बांग्लादेश को उसकी कड़वी हकीकत याद दिला दी है। वर्तमान में, बांग्लादेश अपने इतिहास के सबसे गंभीर बिजली और ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। इस संकट से उबरने के लिए बांग्लादेश की पूरी उम्मीद उसके पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र, रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट, पर टिकी है। इस प्लांट के लिए रूस से यूरेनियम लाने के लिए एक विशेष कार्गो विमान रवाना होने वाला था। लेकिन अचानक पाकिस्तान ने अपनी हवाई सीमा बंद कर दी और रूसी विमान को गुजरने की अनुमति देने से मना कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, ढाका में एयरपोर्ट पर स्वागत की तैयारियां अधूरी रह गईं और बांग्लादेश का पूरा प्रोजेक्ट अब संकट में है.


पाकिस्तान का झटका और बांग्लादेश की प्रतिक्रिया

तारिक रहमान की सरकार को पाकिस्तान ने यह झटका क्यों दिया? सबसे पहले, इस प्रोजेक्ट की संवेदनशीलता को समझना आवश्यक है। बांग्लादेश में लगातार बिजली कटौती और गैस की कमी के कारण उद्योग ठप हो रहे हैं। इस समस्या का स्थायी समाधान रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट है, जिसे रूस की सरकारी परमाणु एजेंसी रोसा टॉम विकसित कर रही है। इस प्लांट की यूनिट टू के लिए यूरेनियम की पहली खेप 24 सितंबर को ढाका पहुंचनी थी। इस विशेष कार्गो का मार्ग बहुत दिलचस्प और कूटनीतिक रूप से संवेदनशील था। विमान को रूस से निकलकर अजरबैजान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और फिर भारत के एयरस्पेस से होते हुए ढाका पहुंचना था। रूस ने सभी आवश्यक क्लीयरेंस मांगे थे, और भारत सहित अन्य देशों ने इस मिशन की गंभीरता को समझते हुए अपने एयरस्पेस का उपयोग करने की अनुमति दी। लेकिन जैसे ही फ्लाइट पाकिस्तान के दरवाजे पर पहुंची, इस्लामाबाद ने नो एंट्री का बोर्ड लगा दिया।


बांग्लादेशी सरकार की प्रतिक्रिया

अब ढाका के हजरत शाह जलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे। वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीम तैनात थी। लेकिन तभी रूसा टॉम का आपातकालीन संदेश आता है। पाकिस्तान ने एयरस्पेस की मंजूरी रद्द कर दी है, जिससे डिलीवरी अनिश्चितकाल के लिए टाल दी गई है। बांग्लादेशी सरकार की स्थिति अब स्पष्ट हो गई है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम ने मीडिया के सामने आकर इस बात को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने फ्लाइट को अपने एयरस्पेस में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। जब पत्रकारों ने पूछा कि पाकिस्तान ने ऐसा क्यों किया, तो मंत्री का जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता, पाकिस्तान ने कोई कारण नहीं बताया। यह सोचने वाली बात है कि जिस देश के साथ आप नई दोस्ती की कसमें खा रहे हैं, वह आपको बिना किसी कारण बताए आपके सबसे बड़े राष्ट्रीय प्रोजेक्ट में बाधा डाल देता है। मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी तौहीदुल इस्लाम के अनुसार, एयरस्पेस रिजेक्शन की जानकारी बिल्कुल आखिरी मिनट पर दी गई, जिससे कोई वैकल्पिक रूट प्लान बनाने का समय नहीं बचा।