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बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के कर्मचारियों का उग्र प्रदर्शन, वेतन वृद्धि की मांग

बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के श्रमिक पिछले तीन दिनों से उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने राजमार्गों को जाम किया और पुलिस के साथ झड़पें कीं। ये प्रदर्शन वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हो रहे हैं, जिससे देश का महत्वपूर्ण विनिर्माण क्षेत्र प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है। जानें इस स्थिति का विस्तृत विश्लेषण और इसके पीछे के कारण।
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बांग्लादेश में कपड़ा श्रमिकों का प्रदर्शन

बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के श्रमिक पिछले तीन दिनों से उग्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया, पुलिस की गाड़ियों सहित कई वाहनों को नुकसान पहुँचाया, और पुलिस के साथ झड़पें कीं। इसके अलावा, एक गोदाम को आग के हवाले कर दिया गया और एक फैक्ट्री में तोड़फोड़ की गई। ये हिंसक प्रदर्शन वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हो रहे हैं, जिससे देश के महत्वपूर्ण विनिर्माण क्षेत्र में ठहराव आ गया है। सोमवार को ये प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहे, जबकि बांग्लादेश लंबे समय से आर्थिक मंदी का सामना कर रहा है। यह प्रदर्शन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत में निर्वासन से लौटने की घोषणा के ठीक पहले हो रहे हैं। विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बांग्लादेश की GDP वृद्धि का अनुमान केवल 3.4% लगाया है, जो 2020 के बाद से सबसे धीमी दर है। बढ़ती महंगाई और स्थिर वेतन के बीच जब श्रमिक सड़कों पर उतरे, तो सरकार ने शेख हसीना की अवामी लीग और "सीमा पार के कुछ लोगों" पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।


शेख हसीना के कार्यकाल का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में गिरावट आई। हसीना के कार्यकाल में रेडीमेड गारमेंट उद्योग, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, ने जबरदस्त प्रगति की थी। रॉयटर्स के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 40 लाख लोग कार्यरत हैं, जो बांग्लादेश के कुल निर्यात का 80% और GDP का लगभग 10% योगदान करते हैं। हालाँकि, अब यह क्षेत्र भारी उथल-पुथल का सामना कर रहा है; सप्ताहांत में सैकड़ों कारखाने बंद हो गए, जिससे लगभग दस लाख श्रमिक प्रभावित हुए। सोमवार को कुछ कारखाने फिर से खोले गए, लेकिन ढाका और अन्य प्रमुख गारमेंट केंद्रों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे। सरकार ने अवामी लीग पर इस अशांति को भड़काने का आरोप लगाया है, जो हसीना की प्रस्तावित वापसी से ठीक एक महीने पहले हुआ है।


विरोध प्रदर्शनों की स्थिति

31 अक्टूबर से बांग्लादेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में गारमेंट कर्मचारियों और पुलिस के बीच झड़पें, आगजनी और सड़कें जाम करने की घटनाएं हो रही हैं। अक्टूबर के दूसरे हिस्से में कई प्रदर्शनों के बाद, सप्ताहांत पर यह अशांति और बढ़ गई। 'प्रोथोम आलो' की रिपोर्ट के अनुसार, गाजीपुर में 31 अक्टूबर को कर्मचारियों ने ढाका-तंगेल राजमार्ग को जाम कर दिया और पुलिस के साथ कई बार झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसमें कम से कम 30 लोग घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की एक गाड़ी समेत 15 वाहनों में तोड़फोड़ की। अगले दिन ढाका के मीरपुर में हिंसा और तेज हो गई, जहां कर्मचारियों ने मीरपुर-10 चौराहे को जाम कर दिया और पुलिस से भिड़ गए। 'प्रोथोम आलो' और 'यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ़ बांग्लादेश' की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाकर्मियों पर ईंट-पत्थर फेंके, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस, वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। मीरपुर-11 मेट्रो स्टेशन के नीचे पुलिस की एक गाड़ी में आग लगा दी गई, जबकि मीरपुर और पल्लबी के स्टेशनों को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया।