बांग्लादेश में गारमेंट मजदूरों का प्रदर्शन: वेतन वृद्धि की मांग पर सड़कों पर उतरे लोग
बांग्लादेश में फिर से भड़के आंदोलन
नई दिल्ली: बांग्लादेश में एक बार फिर से विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। 2024 में शेख हसीना की सरकार के खिलाफ आंदोलन के लगभग 28 महीने बाद, लोग अब सड़कों पर हैं। इस बार मुख्य कारण सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि कम वेतन है। गारमेंट श्रमिक अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसमें कई स्थानों पर पुलिस पर हमले, आगजनी और पत्थरबाजी की घटनाएं सामने आई हैं।
प्रदर्शन की शुरुआत और उसके प्रभाव
31 अक्टूबर से शुरू हुए इस आंदोलन में मजदूरों ने ढाका के मिरपुर, आशुलिया, सावर और गाजीपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों को जाम कर दिया और फैक्ट्रियों को बंद करवा दिया। इस हड़ताल के कारण लगभग 529 कारखाने प्रभावित हुए हैं और करीब 10 लाख श्रमिकों का काम ठप हो गया है। कई स्थानों पर पुलिस चौकियों और वाहनों में आग लगा दी गई, जिसके चलते पुलिस को आंसू गैस, वाटर कैनन और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल करना पड़ा। कुछ क्षेत्रों में बांग्लादेश सीमा बल (BGB) को भी तैनात करना पड़ा।
सोमवार को स्थिति सामान्य होने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मिरपुर में मजदूर सेनपारा परबटा क्षेत्र से मुख्य सड़क पर आने का प्रयास कर रहे थे, जिसे पुलिस ने खदेड़ दिया और आंसू गैस का प्रयोग किया। मिरपुर-2 में स्टेडियम के पास भी इसी तरह की झड़पें हुईं। तनाव के कारण मेट्रो सेवा भी प्रभावित हुई है।
मजदूरों की वेतन मांग
मजदूरों का कहना है कि उन्हें वर्तमान में केवल 12,000 टका प्रति माह मिलते हैं, जो महंगाई के इस दौर में परिवार का खर्च उठाने के लिए अपर्याप्त है। वे न्यूनतम वेतन को 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं। बांग्लादेश के गारमेंट क्षेत्र में मजदूरी दुनिया में सबसे कम है।
सरकार का आरोप और गारमेंट उद्योग का महत्व
सरकार ने इस अशांति के लिए अपदस्थ आवामी लीग को जिम्मेदार ठहराया है। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि आवामी लीग से जुड़े फैक्ट्री मालिक और पूर्व सांसद मजदूरों को भड़काकर हाईवे जाम और आगजनी करवा रहे हैं। सरकार के पास इस संबंध में वीडियो और ऑडियो सबूत भी हैं। कुछ फैक्ट्री मालिकों ने जानबूझकर अपने कारखाने बंद कर दिए हैं। सरकार ने वेतन वृद्धि के लिए नया वेतन बोर्ड भी गठित किया है।
यह ध्यान देने योग्य है कि बांग्लादेश की गारमेंट उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। 2024-25 में इस क्षेत्र से 39.35 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जो देश के कुल निर्यात का 81% से अधिक है।
