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बांग्लादेश में भारत विरोधी गतिविधियों में तेजी, चीन की बढ़ती भूमिका

बांग्लादेश में हाल के घटनाक्रमों ने भारत के लिए चिंता बढ़ा दी है। शेख हसीना के तख्तापलट के बाद, तारिक रहमान ने भारत विरोधी नीतियों को अपनाया है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई है। चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच, भारत ने अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं। गृह मंत्री अमित शाह का आगामी दौरा भी इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है। जानें इस मुद्दे पर और क्या हो रहा है।
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बांग्लादेश में भारत विरोधी रुख

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश ने भारत के प्रति विरोधी रुख अपनाना शुरू कर दिया है, जिसके कई प्रमाण सामने आ चुके हैं। पहले मोहम्मद यूनुस ने पाकिस्तान के इशारे पर भारत के खिलाफ बयानबाजी की, जिससे दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा। अब तारिक रहमान भी पीएम बनने के बाद भारत विरोधी नीतियों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने भारत के दुश्मनों के साथ मिलकर ऐसे निर्णय लिए हैं जो भारत को कमजोर करने की दिशा में हैं।


तारिक रहमान ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चीन का चयन किया, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। वह चीन को बांग्लादेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने में जुटे हैं। यह स्थिति भारत के लिए चिंताजनक है, खासकर जब बात तीस्ता प्रोजेक्ट और लाल मॉडरहाट एयरबेस की हो, जो भारतीय सीमा से 20 किमी से भी कम दूरी पर स्थित है।


भारत की सुरक्षा तैयारियाँ

चीन की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए भारत सतर्क हो गया है। बांग्लादेश में चीन की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और सीमा पर किसी भी साजिश का जवाब देने के लिए तैयारियाँ की जा रही हैं। हाल ही में भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर का दौरा किया, जहां उन्होंने सुरक्षा रणनीतियों की समीक्षा की।


अब गृह मंत्री अमित शाह भी चिकन नेक का दौरा करने वाले हैं, जिससे बांग्लादेश में हलचल मच गई है। इस दौरे के दौरान शाह बीएसएफ की जुमागा सीमा चौकी का निरीक्षण करेंगे और जवानों से बातचीत करेंगे। इसके अलावा, वे पश्चिम बंगाल में सीमा से जुड़े मामलों पर बैठक की अध्यक्षता करेंगे। चीन की नजर लंबे समय से सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर है, और भारत इस खतरे को भलीभांति समझता है।